Kuno National Park: दक्षिण अफ्रीका से लाये गये एक और चीते की मौत, घंटों बेहोश रहने के बाद 'तेजस' ने तोड़ा दम
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 11 Jul 2023 8:25 PM
चीता तेजस की मौत के साथ ही कूनो नेशनल पार्क में मार्च से अब तक सात चीतों की मौत हो चुकी है, जिसमें चीता ज्वाला के तीन शावक भी शामिल हैं. चीता ज्वाला ने इस साल मार्च में केएनपी में चार शावकों को जन्म दिया था.
दक्षिण अफ्रीका से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाये गये एक और चीते की मौत हो गयी है. घंटों बेहोश रहने के बाद चीता तेजस ने दम तोड़ दिया है. बताया जा रहा है, मॉनिटरिंग टीम को तेजस घायल अवस्था में मिला था, जिसके बाद उसकी इलाज की जा रही थी, लेकिन इलाज के दौरान तेजस की मौत हो गयी.
कूनो में अबतक 4 चीते और 3 शावकों की हो चुकी है मौत
चीता तेजस की मौत के साथ ही कूनो नेशनल पार्क में मार्च से अब तक सात चीतों की मौत हो चुकी है, जिसमें चीता ज्वाला के तीन शावक भी शामिल हैं. चीता ज्वाला ने इस साल मार्च में केएनपी में चार शावकों को जन्म दिया था.
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए दो और चीते केएनपी के जंगलों में छोड़े गए
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) के जंगल में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए दो और चीतों को सोमवार को छोड़ा गया. जिससे वहां इन जीवों की संख्या बढ़कर 12 हो गई थी. श्योपुर संभागीय वन अधिकारी पी के वर्मा ने बताया कि सोमवार को दो नर चीतों-प्रभास और पावक को केएनपी के जंगल में छोड़ दिया गया। इन दोनों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था.
नामीबिया से भी लाये गये थे चीते
भारत में चीतों की आबादी को फिर से बसाने के एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत आठ चीतों को नामीबिया से केएनपी लाया गया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को इन्हे विशेष बाड़ों में छोड़ा. इनमें पांच मादा और तीन नर चीते शामिल थे. इस साल 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते (सात नर और पांच मादा) केएनपी में लाए गये थे. चीते को 1952 में देश से विलुप्त घोषित कर दिया गया था.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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