LPG की बड़ी खेप लेकर होर्मुज पार किया जग वसंत और पाइन गैस, दूर होगी गैस की किल्लत

Published by : Pritish Sahay Updated At : 24 Mar 2026 5:08 PM

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जग वसंत और पाइन गैस टैंकर ने पार किया होर्मुज, सांकेतिक फोटो-पीटीआई

LPG Tanker: जग वसंत और पाइन गैस नाम के दो भारतीय एलपीजी टैंकर 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं. इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है. दोनों पोतों पर 60 भारतीय नाविक सवार हैं.

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LPG Tanker: दो भारतीय एलपीजी टैंकर जग वसंत और पाइन गैस अगले 48 घंटें में भारत पहुंच सकते हैं. दोनों ने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पार कर लिया है. इन दोनों जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लदा है. इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है. दोनों पोतों पर 60 भारतीय नाविक भी सवार हैं. पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए थे.

सभी भारतीय जहाज सुरक्षित- शिपिंग मिनिस्ट्री

शिपिंग मिनिस्ट्री के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि गल्फ रीजन में सभी भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा- पिछले 24 घंटों में किसी समुद्री घटना की कोई खबर नहीं है. दो एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. पाइन गैस में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी है और यह 27 मार्च की सुबह न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंच सकता है. वहीं, जग वसंत करीब 47,600 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 26 मार्च को कांडला पोर्ट पर पहुंच सकता है. राजेश सिन्हा ने कहा कि फारस की खाड़ी से इन दोनों जहाजों के निकलने के बाद अब क्षेत्र में 20 भारतीय झंडे वाले जहाज हैं, जिन पर कुल 540 भारतीय नाविक सवार हैं.

20 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज में फंसे

युद्ध की शुरुआत के समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद थे. इनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. पिछले कुछ दिन में दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं. इससे पहले एलपीजी गैस लेकर इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं. भारतीय तेल टैंकर जग लाडकी और टैंकर जग प्रकाश भी सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार कर गया था. वहीं, जग वसंत और पाइन गैस के होर्मुज पार कर जाने के बाद अब पश्चिमी तट पर भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 20 रह गयी है. इनमें पांच एलपीजी लदे टैंकर हैं.

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पश्चिमी भाग में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से मूल रूप से छह एलपीजी वाहक थे. एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क यानी थोक सामान की ढुलाई करने वाले हैं. इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और तीन नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं. उन्होंने बताया कि खाली जहाज में एलपीजी भर दी गई है. इससे खाना पकाने की गैस से भरे जहाजों की संख्या सात हो गई है.

तेल और गैस खरीदता है भारत

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है. युद्ध शुरू होने से पहले भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था. इन क्षेत्रों से आने वाले जहाज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं. एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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