पीएम मोदी ने समझौता कर लिया है, इस मुद्दे पर लोकसभा में राहुल गांधी और रविशंकर के बीच तीखी बहस

Edited by Rajneesh Anand
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राहुल गांधी और रविशंकर प्रसाद

Rahul Gandhi : विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बीजेपी नेता रविशंकर के बीच लोकसभा के बजट सत्र में तीखी बहस हुई. राहुल गांधी ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है और सदन में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा है.

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Rahul Gandhi : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में यह दावा किया कि उन्हें सदन में बोलने से कई बार रोका गया. देश के इतिहास में यह पहली बार है कि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया कर लिया है और यह बात सभी जानते हैं, लेकिन जब भी मैं इस बात को कहने की कोशिश करता हूं या जनहित के किसी मुद्दे को उठाने की कोशिश करता हूं, तो मुझे बोलने से रोक दिया जाता है.

रविशंकर और राहुल गांधी के बीच हुई तीखी नोकझोंक

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने संसदीय प्रणाली पर ‘कॉल एंड शकधर’ की एक किताब को उद्धृत करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रहित के मुद्दों पर बोलते समय ध्यानपूर्वक शब्दों का चयन करना चाहिए और विदेशी धरती पर दलीय राजनीति नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह किताब पढ़ लेनी चाहिए. रविशंकर प्रसाद के इसी बयान पर सदन में हंगामा हुआ और राहुल गांधी ने यह कहा कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता है. जब भी वे यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है, उन्हें टोका जाता है. जब वे पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के किताब की चर्चा करते हैं, तो उन्हें रोका जाता है. इस बात पर रविशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय हितों से समझौता कर ही नहीं सकते हैं.

सदन के इतिहास में पहली बार विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया

लोकसभा में राहुल गांधी ने कहा कि कई बार मुझे सदन में बोलने से रोका गया है. भारत के इतिहास में पहली बार विपक्ष के नेता को सदन में बोलने नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि यह सदन देश की जनता की अभिव्यक्ति के लिए है. यह सदन एक पार्टी का नहीं है, बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करता है. बावजूद इसके यहां हमें बोलने नहीं दिया जाता है. यह लोकतंत्र के खिलाफ है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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