Lok Sabha Election 2024 : पीएम मोदी ने कहा-योजनाओं का लाभ देने में हमने धर्म नहीं पूछा, यह कांग्रेस का सपना है
प्रधानमंत्री ने नासिक में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नकली शिवसेना का कांग्रेस में विलय हो जाएगा और इससे सबसे ज्यादा दुख बाला साहब को होगा.
Lok Sabha Election 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस बुरी तरह से हारने वाली है, चुनाव परिणाम आने के बाद इनकी स्थिति ऐसी हो जाएगी कि विपक्ष का दर्जा पाना भी मुश्किल हो जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उक्त बातें महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस यह चाहती है कि छोटी-छोटी पार्टियों का उसमें विलय हो जाए, ताकि जब चुनाव परिणाम आए, तो इन्हें कम से कम विपक्ष का दर्जा तो मिल जाए.
नकली शिवसेना का कांग्रेस में विलय हो जाएगा
पीएम मोदी ने शिवसेना यूबीटी पर प्रहार करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि नकली शिवसेना का कांग्रेस में विलय हो जाएगा, लेकिन जिस दिन ऐसा होगा मुझे बालासाहब ठाकरे की सबसे ज्यादा याद आएगी. वे यह कहा करते थे कि जिस दिन शिवसेना कांग्रेस हो गई उस दिन, शिवसेना बेकार हो जाएगी, समाप्त हो जाएगी. यह स्थिति बाला साहब ठाकरे को दुखी करने वाली है. नकली शिवसेना ने उनके सपनों को चूर-चूर कर दिया है. बाला साहब का सपना था कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने. उनका सपना था कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 समाप्त हो. लेकिन जब ऐसा हुआ तो नकली शिवसेना अनाप-शनाप बोल रही है. कांग्रेस ने राम मंदिर का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया, नकली शिवसेना ने भी ऐसा ही किया. यह कांग्रेस के पाप में भागीदार है.
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कांग्रेस सिर्फ अपने वोट बैंक को लाभ देना चाहती है
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस यह चाहती है कि देश के बजट का 15 फीसदी अल्पसंख्यकों पर खर्च किया जाए. लेकिन कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक का मतलब उनका प्रिय वोट बैंक है. लेकिन धार्मिक आधार पर बजट का बंटवारा खतरनाक है. डॉ बाबासाहेब अंबेडकर धर्म-आधारित आरक्षण के खिलाफ थे, लेकिन कांग्रेस धर्म के आधार पर आरक्षण देना चाहती है. उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बहुत खतरनाक विचार है. मैं उन्हें यह बता देना चाहता हूं कि देश में बजट का बंटवारा धर्म के आधार पर नहीं होगा. मेरी सरकार ने धर्म के आधार पर कोई विभाजन नहीं किया है, जो योजनाएं हैं वो सबके लिए हैं, किसी को लाभ देते वक्त उसका धर्म नहीं पूछा जाता है. कांग्रेस को सिर्फ अपने वोटबैंक की चिंता है, यही वजह है कि इन चार चरणों का जो चुनाव हो चुका है, उसमें कांग्रेस की स्थिति बहुत खराब है. मैं आपके सामने आज आया हूं तो तीसरे कार्यकाल के लिए आपका आशीर्वाद मांगने आया हूं. आपका साथ अगर हमें मिलेगा तो देश विकास के पथ पर चलता रहेगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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