22 एक्सप्रेस-वे के जाल से बदलेगी यूपी की सूरत

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 27 Feb 2026 9:53 AM

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यूपी में कितने एक्सप्रेसवे? (सांकेतिक तस्वीर)

Expressway in UP: सात चालू, तीन निर्माणाधीन और 12 प्रस्तावित परियोजनाओं से देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क बनेगा. औद्योगिक सामान की ढुलाई अब तेज होगी और लॉजिस्टिक का खर्चा भी घटेगा.

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Expressway in UP: उत्तर प्रदेश तेजी से देश का पहला ऐसा राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क होगा. फरवरी 2026 तक यहां कुल 22 एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं – 7 पूरी तरह तैयार, 3 निर्माणाधीन और 12 प्रस्तावित या स्वीकृत. इनसे प्रदेश के सभी जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और उद्योग-धंधों को नई रफ्तार मिलेगी. मुख्यमंत्री योगी ने जापान दौरे में कहा कि एक्सप्रेस-वे के पास 27 इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे.

ये एक्सप्रेस-वे पूरी तरह चालू

वर्तमान में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, यमुना एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पूरी तरह चालू हैं. ये एक्सप्रेस-वे न केवल प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सीधी और तेज कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित कर रहे हैं.

निर्माणाधीन परियोजनाओं के बारे में जानें

निर्माणाधीन परियोजनाओं में गंगा एक्सप्रेस-वे को सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना माना जा रहा है. लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ेगा. इसके अलावा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे समेत अन्य परियोजनाएं भी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं. प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे में विंध्य एक्सप्रेस-वे, जिसकी लंबाई लगभग 320 किलोमीटर है और जो प्रयागराज से सोनभद्र को जोड़ेगा, विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे सहित अन्य लिंक परियोजनाएं प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य औद्योगिक धारा से जोड़ने का माध्यम बनेंगी.

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एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से उद्योग-धंधों को मिलेगी नई दिशा

विस्तृत एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, औद्योगिकरण को नई दिशा देगा. बेहतर सड़कों और तेज परिवहन से औद्योगिक माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी. इससे विनिर्माण इकाइयों, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्कों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा. एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क और निवेश क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों को भूमि, परिवहन और बाजार तक त्वरित पहुंच उपलब्ध हो सके.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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