यूपी पंचायत चुनाव में क्यों हो रही देरी? पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने किया खुलासा

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ओम प्रकाश राजभर

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UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों में देरी क्यों हो रही है, इसका खुलासा पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने किया है. कोर्ट में अटके मामले, ओबीसी आरक्षण और प्रशासकों की नियुक्ति पर विस्तार से जानें.

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UP Panchayat Election 2026: यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव में देरी क्यों हो रही है, इसकी वजह पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया के सामने आकर बताई है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार थी और चुनाव संबंधी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली गई थीं. हालांकि, मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई और निर्धारित समय पर चुनाव नहीं कराए जा सके. राजभर के अनुसार, अदालत में दायर याचिकाओं, ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दों और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने संबंधी विवाद के कारण चुनाव कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पाया. उन्होंने कहा कि अब सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेंगे.

कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद बदली स्थिति

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं, इसी दौरान समाजवादी पार्टी से जुड़े एक कानूनी सलाहकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा. सरकार और आयोग ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग (ओबीसी आयोग) के गठन का निर्देश दिया, जिसके बाद सरकार ने आयोग का गठन भी कर दिया.

प्रशासक नियुक्ति पर हाईकोर्ट की नजर

राजभर ने कहा कि अब ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला भी अदालत के सामने है. हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक क्यों नियुक्त किया गया. इस संबंध में सरकार अदालत के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करेगी. वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने हाल ही में इस मुद्दे पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा है कि समान मामला पहले से लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है, जहां बलिया और सहारनपुर से दायर याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही है.

कोर्ट के फैसले पर टिकी चुनाव की राह

पंचायत चुनाव की संभावित तारीख को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने कहा कि अब मामला न्यायालय में है और आगे की प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार ही चलेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे. ऐसे में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसका फैसला काफी हद तक अदालत में चल रही सुनवाई और उससे निकलने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगा.

चायत चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई टली

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने कहा कि यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में लंबित है, जहां दो न्यायाधीशों की पीठ इसकी सुनवाई कर रही है. अदालत ने बताया कि बलिया और सहारनपुर से दायर याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुना जा रहा है. इससे पहले हाईकोर्ट ग्राम प्रधानों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक बनाए रखने पर आपत्ति जता चुका है. अब मामले की सुनवाई लखनऊ खंडपीठ में ही आगे बढ़ेगी.

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राधेश्याम कुशवाहा

लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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