ट्रेनों में सब्जियों की तरह बर्थ बेचते हैं टीटीई, कलकत्ता हाईकोर्ट ने सभी रेलवे महाप्रबंधकों को दिये कार्रवाई के निर्देश

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सब्जियों की तरह बर्थ बेचते हैं टीटीई : कलकत्ता हाईकोर्ट

West Bengal News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि टीटीई ट्रेनों में खाली बर्थ सब्जियों की तरह बेचते हैं. तीस्ता-तोरसा एक्सप्रेस में लूटपाट और नशीले पदार्थ से हुई यात्री की मौत के लिए अदालत ने टीटीई की भूमिका को ठहराया जिम्मेदार. पुलिस जांच पर भी उठाये सवाल. अदालत ने भारतीय रेलवे को सख्त निर्देश दिये हैं.

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West Bengal News: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भारतीय रेल में यात्रा टिकट परीक्षकों (TTE) की कार्यशैली पर बेहद तीखी और सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि कुछ टीटीई रेलगाड़ियों में खाली बर्थ को ‘बाजार में सब्जियों की तरह बेचते हैं’. हाईकोर्ट ने देश के सभी रेलवे मंडलों के महाप्रबंधकों (GMs) को निर्देश दिया है कि ट्रेनों में रिश्वत लेकर बर्थ आवंटित करने वाले टीटीई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें.

जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस विश्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि टीटीई की इसी तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत और भ्रष्टाचार के कारण ट्रेन में 2 यात्रियों से नशा खुरानी (मादक पदार्थ देकर लूटपाट) हुई, जिसमें से एक यात्री की मौत हो गयी.

क्या था पूरा मामला?

फरवरी 2009 की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह आ रही तीस्ता-तोरसा एक्सप्रेस में 2 यात्री (अरुण चक्रवर्ती और सुनील कुमार दास) अनारक्षित (Unreserved) टिकट लेकर सवार हुए. अपनी पुरानी आदत के अनुसार, उन्होंने ऑन-ड्यूटी टीटीई को रिश्वत देकर ट्रेन में बर्थ हासिल कर ली.

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नशे के ओवरडोज से यात्री की हो गयी मौत

यात्रा के दौरान ट्रेन में सवार 2 अपराधियों ने दोनों यात्रियों को अपना शिकार बनाया. उन्हें नशीला पदार्थ पिलाकर उनके कीमती सामान लूट लिये. अत्यधिक नशीले पदार्थ के सेवन और पहले से बीमार होने के कारण सुनील कुमार दास की मौत हो गयी. 9 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद अरुण चक्रवर्ती की जान बची.

अपराध की मूल वजह टीटीई की लापरवाही : हाईकोर्ट

न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति विश्वरूप चौधरी की पीठ ने कहा- यह अदालत इस फैसले की प्रति पूर्वी रेलवे सहित देश के सभी रेलवे मंडलों के महाप्रबंधकों को भेज रही है, ताकि ट्रेन की खाली बर्थ को बाजार में सब्जियों की तरह बेचने वाले टीटीई के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. ऐसे अपराधों के लिए टीटीई की भूमिका ही मूल कारण बनती है, क्योंकि बिना आधिकारिक प्रक्रिया के रिश्वत देकर बर्थ हासिल करने वाले यात्रियों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ होता है.

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कोर्ट से सहमत हुए वकील - बिना रिजर्वेशन वाले यात्रियों की पहचान मुश्किल

अदालत में सुनवाई के दौरान वकीलों ने भी माना कि बिना पूर्व आरक्षण के रिश्वत देकर बर्थ लेने वाले यात्रियों की पहचान करना असंभव होता है, क्योंकि उनका नाम, मोबाइल नंबर या अन्य पहचान विवरण रेलवे चार्ट में दर्ज नहीं होता.

पुलिस जांच और अभियोजन की आलोचना

हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच में हुई गंभीर खामियों के लिए पुलिस और जांच अधिकारियों को भी फटकार लगायी. अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी ने मृतक की विसरा रिपोर्ट तक फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) से प्राप्त नहीं की, जो एक अक्षम्य चूक है.

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आजीवन सजा पा चुके आरोपी अभी जमानत पर

इस मामले में निचली अदालत (सियालदह सत्र अदालत) ने 10 जुलाई 2017 को आलोक घोष और गोपाल मिस्त्री को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 328 (जहर देना) और चोरी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. दोनों आरोपी 10 से 16 साल जेल में बिताने के बाद फिलहाल जमानत पर हैं.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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