यूपी ग्राम पंचायत चुनाव के मामले में सुनवाई टली, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया कारण

यूपी ग्राम पंचायत चुनाव 2026
UP Panchayat Election 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक बनाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. इस मामले की सुनवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है.
UP Panchayat Election 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है. न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि इसी मुद्दे से जुड़ा मामला पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है, जहां दो न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई कर रही है. ऐसे में न्यायिक अनुशासन और समानांतर सुनवाई से बचने के लिए एकल पीठ इस स्तर पर मामले की सुनवाई नहीं कर सकती.
लखनऊ खंडपीठ में पहले से लंबित है मामला
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने और पंचायत चुनावों में हुई देरी से संबंधित मुद्दों पर लखनऊ खंडपीठ पहले से सुनवाई कर रही है. ऐसे में एक ही विषय पर अलग-अलग पीठों द्वारा सुनवाई उचित नहीं होगी. इसी आधार पर अदालत ने याचिका को छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया. यह मामला पंचायत चुनावों की समयबद्धता, ग्राम प्रधानों की प्रशासनिक भूमिका और राज्य सरकार के निर्णयों की वैधता से जुड़ा हुआ है, जिस पर पहले भी न्यायालय गंभीर टिप्पणियां कर चुका है.
पिछली सुनवाई में सरकार के आदेशों पर उठे थे सवाल
इससे पहले लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने पंचायत चुनाव टालने से जुड़े 25 और 26 मई 2026 के सरकारी आदेशों पर कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा था कि जिन प्रावधानों के आधार पर ये आदेश जारी किए गए, उन्हें पहले ही उच्च न्यायालय की खंडपीठ असंवैधानिक घोषित कर चुकी है. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के का हवाला देते हुए कहा था कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निश्चित होता है और समय पर चुनाव कराना संवैधानिक दायित्व है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया था, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को जानकारी दी थी कि मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है. आयोग का कहना था कि आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग नहीं मिलने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.
क्या है पूरा विवाद?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसके बाद राज्य सरकार ने कई स्थानों पर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी. इस फैसले को अदालत में चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समयबद्ध चुनाव कराना संवैधानिक आवश्यकता है और प्रशासक नियुक्त कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लंबे समय तक टालना उचित नहीं है. याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि इससे राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका प्रभावित होती है और पंचायत चुनावों में अनावश्यक देरी होती है. अब इस पूरे मामले पर अंतिम दिशा-निर्देश और कानूनी स्थिति लखनऊ खंडपीठ में चल रही सुनवाई के बाद अधिक स्पष्ट हो सकेगी.
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र-यूपी सरकार और ट्रस्ट से मांगा जवाब
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By राधेश्याम कुशवाहा
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










