Kisan Andolan: 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे किसान, मोदी सरकार को दी चेतावनी

New Delhi: Farmers during their sit-in protest against the Centre's farm reform laws, near Ghazipur border in New Delhi, Saturday, Dec. 12, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI12-12-2020_000182B)
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार की ओर से लायी गयी तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर पिछले एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे किसान (Kisan Andolan) 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) निकालेंगे. किसान यूनियनों ने शनिवार को कहा कि हमने 26 जनवरी को दिल्ली की ओर एक ट्रैक्टर परेड का आह्वान किया है. किसान यूनियनों (Kisan Union) ने कहा कि हम शांतिपूर्ण थे, शांतिपूर्ण हैं और शांतिपूर्ण रहेंगे. लेकिन तब तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे, जब तक कि नये कृषि कानूनों को निरस्त नहीं किया जाता.
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार की ओर से लायी गयी तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर पिछले एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे किसान (Kisan Andolan) 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) निकालेंगे. किसान यूनियनों ने शनिवार को कहा कि हमने 26 जनवरी को दिल्ली की ओर एक ट्रैक्टर परेड का आह्वान किया है. किसान यूनियनों (Kisan Union) ने कहा कि हम शांतिपूर्ण थे, शांतिपूर्ण हैं और शांतिपूर्ण रहेंगे. लेकिन तब तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे, जब तक कि नये कृषि कानूनों को निरस्त नहीं किया जाता.
किसान नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के साथ दिल्ली की ओर ट्रैक्टर परेड निकाला जायेगा. इसे ‘किसान परेड’ कहा जायेगा. किसान नेता अशोक धवले ने कहा कि हमारे आंदोलन के दौरान 50 से अधिक किसान शहीद हो गये हैं. वहीं, किसानों के समर्थन में उतरी स्वराज इंडिया प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा कि यह कोरा झूठ है कि सरकार ने किसानों की 50 फीसदी मांग मान ली है. हमें अभी तक कागज पर कुछ नहीं मिला है.
बता दें कि किसानों के प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और किसानों के बीच कई स्तर की वार्ताओं का आयोजन हो चुका है. लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है. किसानों का आंदोलन नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. सरकार ने कई मौकों पर कहा है कि नये कृषि कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि मंडियों को समाप्त नहीं किया जायेगा. इसके बावजूद किसान कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं.
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केंद्र सरकार ने 4 जनवरी को एक बार फिर वार्ता के लिए किसानों को आमंत्रित किया है. अपने तेवर सख्त करते हुए किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार चार जनवरी की बैठक में कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग को पूरा नहीं करेगी तो आंदोलन और तेज होगा. किसान नेताओं ने कहा कि वे हरियाणा में सभी मॉल और पेट्रोल पंप बंद करना शुरू कर देंगे.
किसान नेताओं ने पीटीआई भाषा से कहा कि अगर सरकार चार जनवरी को उनके पक्ष में फैसला नहीं लेती है तो वे कड़े कदम उठायेंगे. स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी जैसे दो मुख्य मुद्दों पर सरकार एक इंच भी नहीं बढ़ी है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से प्रतिबद्धता जताने से इनकार किया है.
दिल्ली की सीमाओं पर लगभग 40 किसान यूनियन संयुक्त किसान मोर्चे के तहत आंदोलन कर रही हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन में ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा के हैं. सरकार का कहना है कि नये कानूनों से कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी लेकिन किसान कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं.
Posted By: Amlesh Nandan.
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