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Shashi Tharoor :  पुतिन से मिलने का मौका शशि थरूर को मिला, राहुल गांधी को क्यों नहीं? समझिए क्या है प्रोटोकाॅल

6 Dec, 2025 10:40 am
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Shashi Tharoor in Rastrapati Bhawan

शशि थरूर राष्ट्रपति भवन के भोज में.

Shashi Tharoor : राजनीति में एक शब्द प्रचलित है प्रोटोकाॅल. प्रोटोकाॅल का अर्थ होता है किसी कार्य को करने के तय और स्वीकृत नियम, तरीके और शिष्टाचार. इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है. जब कोई विदेशी मेहमान, हमारे देश आता है तो प्रोटोकाॅल के तहत ही उनका स्वागत, मुलाकात और अन्य शिष्टाचार तय किए जाते हैं. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के दौरे के दौरान उन प्रोटोकाॅल का उल्लंघन किया है. सरकार ने कांग्रेस के सांसद शशि थरूर को तो पुतिन से मिलने का मौका दिया, लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नहीं. आइए समझते हैं क्या कहता है प्रोटोकाॅल.

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Shashi Tharoor : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौट चुके हैं. इस यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया है, लेकिन इस यात्रा से एक विवाद अपने देश में शुरू हो गया है. विपक्ष का आरोप यह है कि सरकार विदेशी मेहमानों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मिलने का मौका नहीं दे रही है और यह प्रोटोकाॅल का उल्लंघन है. 

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रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ पीएम मोदी

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया है कि सरकार प्रोटोकाॅल तोड़ रही है और डेमोक्रेसी की परंपराओं का उल्लंघन कर रही है. डेमोक्रेसी परंपराओं से ही चलता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि विदेशी मेहमान पुतिन के लिए जो भोज राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, उसमें भी विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आमंत्रित नहीं किया गया, लेकिन कांग्रेस नेता शशि थरूर को आमंत्रित किया गया है.

शशि थरूर को निमंत्रण, राहुल–खरगे को क्यों नहीं?

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मीडिया के सामने यह स्पष्ट कहा कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में आयोजित भोज में शामिल होने का न्यौता उन्हें मिला है, जबकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भोज में शामिल होने का न्यौता नहीं मिला. शशि थरूर ने यह कहा भी कि वे इस भोज में जरूरी शामिल होंगे. यह डेमोक्रेसी के लिए अच्छा है कि विपक्ष को भी विदेशी मेहमानों से मिलने दिया जा रहा है. वहीं कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने कहा है कि यह सरकार की चाल है कि वो विपक्ष के नेता को तो विदेशी मेहमान से मिलने नहीं दे रही है, लेकिन उसी पार्टी के एक सांसद को भोज में आमंत्रित किया जा रहा है.

राहुल गांधी ने सरकार पर क्यों लगाया आरोप?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वह असुरक्षित महसूस करती है, इसकी वजह यह है कि जब विपक्ष का नेता विदेशी मेहमानों से मिलता है, तो उन्हें एक अलग नजरिया पेश करता है. राहुल ने कहा कि सरकार परंपराओं को तोड़ती जा रही है. जब मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तो विपक्ष के नेता को विदेशी मेहमानों से मिलने दिया जाता था. पर अब ऐसा नहीं हो रहा है.

विदेशी मेहमानों को लेकर क्या है प्रोटोकाॅल?

राज्यसभा के सांसद और पूर्व राजनयिक हर्ष वर्धन श्रृंगला ने मीडिया को बताया कि विदेशी मेहमान को लेकर ऐसा कोई प्रोटोकाॅल नहीं है कि वह विपक्ष के नेता से मिले. यह सबकुछ विदेशी मेहमान के पास कितना समय और उनकी इच्छा पर निर्भर करता है. इस संबंध में कोई लिखित प्रोटोकाॅल नहीं है. हां, कई बार विपक्ष के नेताओं से विदेशी मेहमान मिलते भी हैं.

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विदेशी मेहमानों को लेकर क्या रहा है इतिहास?

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राहुल गांधी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना. साथ ही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी

यह बात सही है कि जब कोई विदेशी मेहमान देश में आते हैं, तो वे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से तो मिलते ही हैं. इसके अलावा वे विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और अन्य विभागों के उच्च अधिकारियों से भी मिलते हैं, लेकिन ऐसा तभी होता है जब उनसे संबंधित कोई कार्य हो. विपक्ष के नेता से मिलने को लेकर कोई प्रोटोकाॅल तो देश में नहीं है, लेकिन विपक्ष के नेता परंपरा अनुसार विदेशी मेहमान से मिलते हैं. मनोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कई बार विदेशी मेहमानों से विपक्ष के नेता के मिलने की जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई है. लेकिन विदेशी मेहमान के हर विजिट में ऐसा होता हो यह जरूरी नहीं है. इसकी वजह यह है कि विदेशी मेहमान कितने समय के लिए उपलब्ध है, यह देखना जरूरी होता है. उसके बाद उनकी प्राथमिकताएं भी होती हैं.  जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो उन्होंने भी वर्ष 2024 और 2025 में कई विदेशी मेहमानों से मुलाकात की है, जिसमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और माॅरीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम से राहुल गांधी की मुलाकात शामिल है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव. राजनीति,सामाजिक मुद्दे, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है.

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