संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड 3 में क्या है, जिसके तहत राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया?

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Apr 2026 5:30 PM

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हरिवंश नारायण सिंह

Harivansh Narayan Singh : गृहमंत्रालय ने 10 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें यह जानकारी दी गई है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत वर्णित प्रावधानों के अनुसार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है. इस अधिसूचना के जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई दी है. आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में क्या कहा और संविधान के अनुच्छेद 80 में क्या वर्णित है.

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Harivansh Narayan Singh : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के उपसभापति रहे हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं. प्रधानमंत्री ने उन्हें उनके अगले संसदीय कार्यकाल के लिए बधाई दी है. राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने के बाद हरिवंश ने एक्स पर पोस्ट लिखकर राष्ट्रपति का हृदय से आभार व्यक्त किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कृतज्ञता व सम्मान भी प्रकट किया और गृह मंत्री अमित शाह और मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और वरिष्ठों को धन्यवाद दिया.

सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं हरिवंश

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट लिखकर हरिवंश नारायण सिंह के योगदानों की तारीफ की है. प्रधानमंत्री ने लिखा है कि हरिवंश ने पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में बहुत कीमती योगदान दिया है. वे एक सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं. अपने गहरे विचारों और समझ से, उन्होंने पिछले कुछ सालों में सदन की कार्यवाही को बेहतर बनाया है. मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है, आने वाले संसदीय कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी शुभकामनाएं. 9 अप्रैल को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था. वे दो बार बिहार से जदयू सदस्य के रूप में चुने गए थे. वे 2018 से राज्यसभा के उपसभापति के रूप में काम कर रहे हैं.

संविधान के अनुच्छेद 80 में क्या है, जिसके तहत मनोनीत किए गए हरिवंश

संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड(3) के साथ पठित खंड (1) के उपखंड (क) में वर्णित शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है. संविधान के इस अनुच्छेद में यह बताया गया है कि राज्यसभा की संरचना कैसी होगी और इसके सदस्य कौन होंगे. अनुच्छेद 80 में यह बताया गया है कि राज्यसभा में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और राष्ट्रपति द्वारा नामित व्यक्ति होंगे.अनुच्छेद का खंड 3 यह बताता है कि राष्ट्रपति किस तरह के लोगों को नामित कर सकते हैं. इसमें साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा से जुड़े लोगों को नामित किया जाता है. खंड 3 के पठित खंड 1 का मतलब है कि यह राष्ट्रपति को नामांकन की शक्ति देता है. राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 ऐसे व्यक्तियों को नामित कर सकते हैं, जो ऊपर वर्णित क्षेत्रों के विशेषज्ञ हों.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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