Girmitiya: गिरमिटिया महोत्सव के जरिये समाज के संघर्ष से लोगों को अवगत कराने की हुई पहल

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 30 Sep 2024 7:16 PM

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गिरमिटिया महोत्सव 2024 का आयोजन गिरमिटिया फाउंडेशन एवं इंडियन काउंसिल फॉर फिलॉसफिकल रिसर्च (आईसीपीआर) के संयुक्‍त तत्वाधान में किया गया.इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को मॉरीशस के राजदूत हरमन दयाल दिलम ने भी संबोधित किया.

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Girmitiya: मॉरीशस, गुयाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, सूरीनाम, फिजी, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में 19वीं सदी के उत्तरार्ध में एग्रीमेंट के तहत भारत से हजारों की संख्या में मजदूरों को ले जाया गया था. ऐसे मजदूरों को गिरमिटिया मजदूर के तौर पर जाना जाता है. वैसे भारतीय गिरमिटिया मजदूरों की मौजूदा पीढ़ी आज भी भारत में अपनी जड़े तलाशते हैं, जिन्हें गिरमिटिया फाउंडेशन उनके पूर्वजों के पुण्य भूमि तक पहुंचाने में सहायता प्रदान करता है. गिरमिटिया वंशी अपने देश में भारतीय संस्कृति, पर्व त्योहार, रहन-सहन, खान-पान को पूरी श्रद्धा से निभाते हैं. शनिवार को गिरमिटिया महोत्सव 2024 का आयोजन गिरमिटिया फाउंडेशन एवं आईसीपीआर के संयुक्त तत्वाधान में दिल्ली के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में किया गया.

 ‘गिरमिटिया की विरासत: सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित इस एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मॉरीशस के राजदूत हरमन दयाल दिलम ने कहा कि गिरमिटिया मजदूरों  के विस्‍थापन के दर्द को महज कहानी या टेल ऑफ टू सिटी के रूप में देखे जाने के बजाए उसे भोगे हुए यथार्थ के रूप में देखे जाने की जरूरत है. इस दौरान भारतीय गिरमिटिया समुदाय के संघर्ष से सफलता के इतिहास पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी. कैरेबियन समेत बाकी देशों में भी फाग, रामलीला सहित सभी भारतीय त्योहार, खानपान, पूजा- पता एवं भारतीय संगीत को अपनी जीवनचर्या में समाहित कर रखा है. ब्रिटिश शासन की अमानवीय प्रताड़ना सहने के सैकड़ों वर्षों बाद भी उन गिरमिटिया वंशियों ने भारतीय संस्कृति के केंद्र ‘राम’ को उसी तरह अपने जीवन के केंद्र में रखा जिस तरह भारत की संस्कृति में राम मौजूद हैं.


गिरमिटिया विरासत में है संघर्ष की गाथा


इस आयोजन में गिरमिटिया प्रवासियों के जीवन और उनके पीड़ा तथा आर्य समाज के योगदान पर चर्चा की गयी. गिरमिटिया जो आज से 200 सौ साल पहले बिहार, उत्तर प्रदेश के धरती से गए, उनके संघर्ष को याद किया गया. ‘गिरमिटिया संस्मरण:एक अनकहा इतिहास’ विषय पर डॉक्टर अरुण कुमार मिश्र, अशोक मानसाराम, राजीव रंजन गिरि, डॉक्टर सत्य प्रिय पांडेय एवं शंभुनाथ मिश्र ने गिरमिटिया समाज की चुनौतियों का जिक्र किया. आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम के समानांतर शोध आलेख वाचन का सत्र भी आयोजित किया गया.

कार्यक्रम के संयोजक और गिरमिटिया फाउंडेशन के अध्यक्ष दिलीप गिरि ने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि गिरमिटिया महोत्सव आयोजन का उद्देश्य भारतीय गिरमिटिया पूर्वजों को श्रद्धांजली अर्पित करना है, साथ ही अधिक से अधिक भारतीयों को इनके इतिहास की जानकारी देना है. सूरीनाम से आए स्टीफन रविइंदर और आरा से आए पुनेश कुमार की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के समापन सत्र में फिजी राजदूत जगनाथ सामी, सूरीनाम राजदूत अरुण कुमार हरदीन, दिल्‍ली भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे आदि मौजूद रहें.  

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