Ganga River Video: गंगा जल में कीटाणुओं को 50 गुना तेजी से खत्म करने की क्षमता, विशेषज्ञ का दावा- अब भी नहाने लायक है पानी
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 22 Feb 2025 4:41 PM
Ganga
Ganga River: प्रयागराज में जारी महाकुंभ मेला 2025 के बीच गंगा नदी में प्रदूषण को लेकर सवाल उठने लगे हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि गंगा जल में बैक्टीरिया का स्तर बढ़ चुका है, जो नहाने लायक नहीं है. इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जिसमें दावा किया गया है कि गंगा जल में कीटाणुओं को 50 गुना तेजी से खत्म करने की क्षमता है.
Ganga River: महाकुंभ में अबतक 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. लेकिन सीपीसीबी की रिपोर्ट ने तहलका मचा दिया है कि गंगा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि वो स्नान करने लायक नहीं बची है. इस दावे के बीच पद्मश्री डॉ अजय सोनकर ने बड़ा खुलासा किया है. उनका दावा है कि 60 करोड़ से अधिक लोगों के नहाने के बावजूद गंगा पूरी तरह से कीटाणु मुक्त है.
गंगा जल में कीटाणुओं को 50 गुना तेजी से खत्म करने की क्षमता
पद्मश्री डॉ अजय सोनकर गंगा जल को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है. उन्होंने गंगा जल की तुलना समुद्री जल से ही है. उनका दावा है कि गंगा के पानी में 1100 प्रकार के बैक्टीरियोफेज होते हैं, जो सुरक्षा गार्ड की तरह काम करते हैं. हानिकारक बैक्टीरिया की सही पहचान करके उन्हें नष्ट करते हैं. बैक्टीरिया से 50 गुना छोटे बैक्टीरियोफेज में अविश्वसनीय शक्ति होती है. वे बैक्टीरिया में घुसपैठ करते हैं, उनके RNA को हैक करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं.
गंगा में खुद को शुद्ध करने की अद्भूत क्षमता : डॉ अजय सोनकर
पद्मश्री डॉ अजय सोनकर ने अपना एक वीडियो जारी किया और बताया, गंगा नदी में खुद को शुद्ध करने की अद्भुत क्षमता है. उन्होंने कहा, “बड़े आयोजनों में गंगा में एक समय पर लाखों की संख्या में लोग डुबकी लगाते हैं, जिससे पानी गंदा हो सकता है, तो स्वाभाविक भी है. लेकिन गंगा प्रदूषण को खत्म करने लिए खुद के अंदर बैक्टीरियोफेज को उत्पन्न करता है, जो एलियन की तरह दिखता है, वो बैक्टीरिया को खत्म करने के बाद खुद भी नष्ट हो जाता है.” उन्होंने बताया, “बैक्टीरियोफेज की विशेषता यह है कि वे केवल हानिकारक बैक्टीरिया को ही नष्ट करते हैं.” डॉ अजय सोनकर का दावा है कि प्रत्येक फेज तेजी से 100-300 नए बैक्टीरियोफेज पैदा करता है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हुए हमला जारी रखते हैं. उन्होंने बताया, “बैक्टीरियोफेज लाभकारी बैक्टीरिया को प्रभावित किए बिना हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं.”
कौन हैं डॉ अजय सोनकर
डॉ अजय सोनकर पद्मश्री हैं. उनकी प्रशंसा कभी पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी की थी. डॉ अजय कैंसर, जेनेटिक कोड, सेल बायोलॉजी और ऑटोफैगी के वैश्विक शोधकर्ता हैं. उन्होंने वैगनिंगन यूनिवर्सिटी, राइस यूनिवर्सिटी, टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ भी सहयोग किया है. डॉ अजय ने टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 2016 के नोबेल पुरस्कार विजेता जापानी वैज्ञानिक डॉ योशिनोरी ओहसुमी के साथ सेल बायोलॉजी और ऑटोफैगी पर बड़े पैमाने पर काम किया है. उन्होंने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में संज्ञानात्मक फिटनेस और संवेदनशील आंत पर भी दो बार काम किया है.
तीन विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने गंगा जल से संबंधित सीपीसीबी की रिपोर्ट को अधूरी बताया
गंगा जल की शुद्धता को लेकर हाल ही में जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट के अंशों को तीन विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने गलत ढंग के प्रसारित करने का संदेह जताया है. उनका कहना है कि ‘नाइट्रेट’ और ‘फॉस्फेट’ जैसे तत्वों का रिपोर्ट में उल्लेख नहीं है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर अमित कुमार मिश्रा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर उमेश कुमार सिंह और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर आरके रंजन ने कहा कि मौजूदा रिपोर्ट के आधार पर भी गंगा जल क्षारीय है, जोकि स्वस्थ जल निकाय का संकेत है. उन्होंने कहा कि जल में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा के आधार पर इसे स्नान योग्य ही माना जाएगा.
सीपीसीबी का क्या है दावा?
कुछ दिन पहले, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें पानी में फीकल कोलीफॉर्म (बैक्टीरिया) के बढ़े हुए स्तर की बात कही गई है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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