कर्नाटक में राजनीतिक हलचल तेज, राज्यपाल से मिलने पहुंचे डीके शिवकुमार; सिद्धारमैया चाहते हैं बेटे के लिए की-पोस्ट

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 30 May 2026 12:23 PM

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डीके शिवकुमार

DK Shivakumar : कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी चल रही है, शाम चार बजे यह स्पष्ट भी हो जाएगा कि कौन कर्नाटक की कमान संभालेगा. इसी बीच डीके शिवकुमार ने राज्यपाल से मुलाकात की. वे सुबह अपने आवास से निकलकर लोकभवन गए थे.

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DK Shivakumar : कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद से राजनीतिक हलचल तेज है. शनिवार शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक निर्धारित है, उसके पहले प्रदेश के उपमुख्ममंत्री और राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने गवर्नर थावर चंद गहलोत से मुलाकात की. चूंकि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है और डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ऊपर है, इसलिए गवर्नर से उनकी मुलाकात पर सबकी नजरें टिकीं हैं.

विधायक दल की बैठक में चुने जाएंगे नेता

शाम 4 बजे लीडरशिप और अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर बातचीत के लिए विधायक दल की अहम बैठक होनी है. इस बैठक में सभी विधायक मौजूद रहेंगे और पार्टी ऑब्जर्वर भी रहेंगे, जो कांग्रेस हाईकमान से सलाह लेकर ही कोई फैसला लेंगे. हालांकि यह तय माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार ही प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे. दिल्ली में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ मैराथन मीटिंग करने के बाद शनिवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. संभव है कि बैठक में डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया जाए और उसके बाद अगले एक-दो दिन में नये मुख्यमंत्री का शपथ भी संभव है.

डीके शिवकुमार ने शपथ लेने के सवालों का नहीं दिया जवाब

डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी. उनसे जब मीडिया के लोगों ने यह सवाल पूछा कि वे कब शपथ लेंगे, तो उन्होंने कहा कि अभी उन्हें यह नहीं पता कि विधायक दल का नेता कौन चुना जाएगा. नेता चुने जाने के बाद ही शपथ पर चर्चा संभव है.

सिद्धारमैया चाहते हैं बेटे यतींद्र के लिए कीपोस्ट

हाईकमान के आदेश पर सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तो छोड़ दी है, लेकिन वे यह चाहते हैं कि उनके बेटे यतींद्र को प्रदेश सरकार में कीपोस्ट मिले. इसकी वजह यह है कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते थे, उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है, इसलिए वे राज्यसभा नहीं जाना चाहते हैं. ऐसे में सिद्धारमैया की भूमिका और उनके बेटे को सही जगह देना भी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि सिद्धारमैया की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचा जा सकती है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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