कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने कहा-डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के CM, सिद्धारमैया नहीं जाएंगे राज्यसभा

कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली
Satish Jarkiholi : कर्नाटक कांग्रेस के नेता और सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे सतीश जारकीहोली ने एएनआई न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि शाम चार बजे विधायक दल की बैठक बस एक प्रक्रिया है, जिसमें डीके शिवकुमार को नेता चुना जाना है.
Satish Jarkiholi : कर्नाटक की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने कहा कि सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद यह पक्का है कि डीके शिवकुमार ही प्रदेश के नये मुख्यमंत्री होंगे. उन्होंने कहा कि इस बात में कोई शक की गुंजाइश ही नहीं हैं.
हाईकमान ने डीके शिवकुमार को चुना है
सतीश जारकीहोली ने कहा कि हाईकमान ने यह तय किया है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे. इस बात की घोषणा पहले ही हो चुकी है. सिद्धारमैया ने भी इसका अनाउंसमेंट किया है, इसलिए कर्नाटक का सीएम कौन होगा, इसमें कोई शक नहीं है. हमें उम्मीद है कि सिद्धारमैया के कार्यकाल में जो अच्छे काम हुए हैं, वे जारी रहेंगे. डीके शिवकुमार के लिए यह एक चुनौती होगी कि वे इन कामों की जिम्मेदारी उठाएं.
सिद्धारमैया राज्य की राजनीति में बने रहेंगे
सतीश जारकीहोली ने कहा कि सिद्धारमैया को हाईकमान ने राज्यसभा सीट ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने कहा कि वह राज्य की राजनीति में बने रहेंगे क्योंकि उनका लक्ष्य 2028 में कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता में लाना है. सिद्धारमैया की रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है. उनके बेटे यतींद्र को की-पोस्ट देने की बात है, इसका निर्णय हाईकमान करेंगे कि उन्हें कैबिनेट में रखना है या नहीं.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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