मणिशंकर अय्यर ने कहा-कांग्रेस-टीवीके गठबंधन अवसरवादी राजनीति का उदाहरण
मणिशंकर अय्यर
Congress-TVK alliance : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में कांग्रेस और टीवीके गठबंधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यह पार्टी का एक आत्मघाती कदम है, जिसमें नैतिकता के लिए कोई जगह ही नहीं बची है.
Congress-TVK alliance : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में टीवीके के साथ कांग्रेस के गठबंधन को बहुत खराब निर्णय बताते हुए कहा कि इससे निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद की बू आती है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दिया है और कहा है कि कांग्रेस भविष्य में भी टीवीके के साथ है. कांग्रेस पार्टी प्रदेश में डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ आई है. डीएमके ने कांग्रेस की इस रणनीति को पीठ में छुरा घोंपने वाला बताया है.
कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा टीवीके को समर्थन देना
मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि कांग्रेस के इस फैसले से निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद की बू आती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस फैसले से बीजेपी को फायदा होगा और वह सत्ता के गलियारे में पिछले दरवाजे से प्रवेश कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए सबसे खतरनाक और राजनीतिक फुटबॉल के इतिहास में सबसे खराब आत्मघाती गोल साबित होगा.अय्यर ने कहा कि वह इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि कांग्रेस के पूर्वज ऐसी अवसरवाद की राजनीति को अपना आशीर्वाद देते.
अवसरवादी राजनीति
पीटीआई न्यूज के अनुसार अय्यर ने कहा कि द्रमुक के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद कांग्रेस का टीवीके के साथ गठजोड़ करने का फैसला बहुत खराब है. उसने 23 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को हराया है.अय्यर ने कहा कि यह महात्मा गांधी के 1925 के उस कथन का अक्षम्य उल्लंघन है कि स्वराज को नैतिकता पर आधारित सरकार होना चाहिए.द हिंदू के तमिल संस्करण में प्रकाशित एक लेख में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूछा कि तमिलनाडु में कांग्रेस के साझेदार बदलने में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की? उनका कहना है कि कांग्रेस ने चुनाव में जो पांच सीटें जीतीं, उसने यह सीटें अपने दम पर नहीं बल्कि पूरी तरह से द्रमुक के साथ अपनी दशकों पुरानी साझेदारी के बल पर जीती. उसके बाद टीवीके के साथ गठबंधन बहुत ही अनैतिक है.
ये भी पढ़ें : केरल का अगला सीएम कौन? अब फैसला होगा दिल्ली में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










