अहमदाबाद : मामूली सी दुर्घटना के बाद हत्या, गुस्साए लोगों ने बिहारवासी की दुकान फूंकी

Published by :Rajneesh Anand
Published at :19 Apr 2026 4:02 PM (IST)
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Gujarat Clash

गुजरात हिंसा

Clash in Gujarat : मैं बिहार का रहने वाला हूं, यहां पंक्चर बनाने का काम करता था. मैंने किसी का क्या बिगाड़ा था, देर रात उन्होंने मेरी दुकान में आग लगा दी. सबकुछ जलकर खाक हो गया है. मैंने 5 लाख का लोन लिया था, इस दुकान के लिए ताकि अपने बच्चों को पढ़ा सकूं, उन्हें पैसे भेज सकूं. मैं अब क्या करूं, कहां जाऊं? यह उस पीड़ित का बयान है, जिसकी दुकान में अहमदाबाद के धंधुका इलाके में हुई हिंसा के बाद आग लगा दी गई थी.

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Clash in Gujarat : अहमदाबाद जिले के धंधुका इलाके में शनिवार को हुई एक मामूली दुर्घटना में दो समुदायों के लोगों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई और बाद में कई दुकानों में आग भी लगाई गई.

मोटरसाइकिल भिड़ंत से शुरू हुई लड़ाई

एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार शनिवार को एक मोटरसाइकिल दुर्घटना हुई, जिसमें दो अलग-अलग समुदाय के दो युवकों के बीच झड़प हुई. बात इतनी बढ़ गई कि बाद में 8-10 लोग दूसरे के घर पहुंच गए और एक व्यक्ति जिसका नाम धर्मेश गमारा है उसे चाकू मार दिया. चाकू मारने की वजह से धर्मेश की मौत हो गई. इस घटना के बाद गुस्साए लोगों ने दूसरे समुदाय के लोगों की कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया. क्षेत्र में तनाव व्याप्त है.

बिहार के व्यक्ति की दुकान को आग के हवाले किया

धर्मेश की मौत के बाद गुस्साए लोगों ने दुकान किनारे की कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया. इनमें से एक दुकान बिहार के मोहम्मद साबिर की थी. उन्होंने रोते हुए एएनआई को बताया कि मैं बिहार से हूं. मैं यहां पंक्चर ठीक करने का काम करता था. मैंने इस दुकान के लिए लोन लिया था. लेकिन मेरी दुकान में आग लगा दी गई. मैं बर्बाद हो गया हूं. अब मैं क्या करूं? मुझे 5-5.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. यह कल करीब 3-3.30 बजे हुआ. मैंने अपनी दुकान बंद कर दी थी और दूर खड़ा था कि वे मुझे भी मार डालेंगे.

मैं छिपा हुआ था और उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरी दुकान में आग लगा दी. मुझमें बाहर आकर बोलने की हिम्मत नहीं थी. मैं बाहर का आदमी हूं, उन्होंने मेरी दुकान में आग क्यों लगाई? मैंने किसी का क्या बिगाड़ा? वे 15-20 लोग थे और उनके हाथों में डंडे थे. मैं यहां अकेला रहता हूं. मैं यहां रोजी-रोटी कमाने आया था ताकि अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ पैसे घर भेज सकूं. अब मैं क्या करूं? मैं कहां जाऊं?

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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