जग्गी हत्याकांड में पूर्व सीएम का बेटा दोषी ठहराया गया, सरेंडर के पहले छलका अमित जोगी दर्द
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 02 Apr 2026 3:53 PM
अमित जोगी (Photo: X)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2003 के जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी करार दिया है. अमित पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे हैं. जानें पूरा मामला.
हाई कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी को 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले में दोषी ठहरा दिया. कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है. इस मामले की जानकारी सीबीआई के वकील ने दी. कोर्ट ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले में कार्यवाही फिर से शुरू की थी.
प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏
— 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 2, 2026
आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए।
मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।… pic.twitter.com/t70pLdLTJ7
कोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने एक्स पर लिखा कि आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए. मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है. अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है. मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है. मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा. मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं. मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं. सत्य की जीत अवश्य होगी. आप सभी से आग्रह है कि मेरे लिए प्रार्थना करें और अपना आशीर्वाद बनाए रखें. जय छत्तीसगढ़…
4 जून 2003 को हुई थी जग्गी की हत्या
सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया. बता दें, एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे.
शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की
इस केस की शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की थी. 2003 में बीजेपी की जीत के बाद रमन सिंह की सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. इसके बाद सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और मामले की आगे की जांच शुरू की.
अमित जोगी सबूतों के अभाव में बरी हुए थे
रायपुर की एक अदालत ने 31 मई 2007 को कहा कि अभियोजन पक्ष (जो आरोपी के खिलाफ केस लड़ता है) 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा. लेकिन उसी फैसले में अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, यानी उन्हें उस समय इस मामले में क्लीन चिट मिल गई थी.
पिछले साल (2025) नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कहा था कि वो सीबीआई की उस याचिका पर दोबारा विचार करे, जिसमें जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी गई थी.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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