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Maharashtra: अजित पवार के साथ भाजपा के सरकार बनाने के प्रयास से राष्ट्रपति शासन खत्म हुआ: शरद पवार

Updated at : 22 Feb 2023 10:08 PM (IST)
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Maharashtra: अजित पवार के साथ भाजपा के सरकार बनाने के प्रयास से राष्ट्रपति शासन खत्म हुआ: शरद पवार

शरद पवार ने बुधवार को कहा कि बीजेपी द्वारा उनके भतीजे और राकांपा नेता अजित पवार के साथ सरकार बनाने की कोशिश का एक फायदा यह हुआ कि, इससे 2019 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया. हांलाकी वो इस बात की जानकारी देने से बचते रहे की उन्हे अजीत पवार के बीजेपी के साथ सरकार बनाने की जानकारी थी.

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NCP प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा उनके भतीजे और राकांपा नेता अजित पवार के साथ सरकार बनाने की कोशिश का एक फायदा यह हुआ कि, इससे 2019 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया. पवार की इस टिप्पणी के बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि NCP प्रमुख को यह भी बताना चाहिए था कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया था.

राष्ट्रपति शासन खत्म होने से फायदा हुआ 

पवार ने पिंपरी चिंचवड़ में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अगर (अजित के साथ सरकार गठन की) ये कवायद नहीं हुई होती, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन जारी रहता. वहीं फडणवीस के इस दावे के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि अजित पवार के साथ सरकार बनाने के लिए राकांपा प्रमुख शरद पवार का भी समर्थन प्राप्त था. NCP प्रमुख ने कहा, “सरकार बनाने का प्रयास किया गया था. उस कवायद का एक फायदा यह हुआ कि इससे महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाने में मदद मिली और उसके बाद जो हुआ, वह सभी ने देखा है.’’

राष्ट्रपति शासन नहीं हटा होता तो उद्धव कैसे सीएम बनते-पवार 

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें इस तरह के सरकार गठन के बारे में पता था और अजित पवार इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, NCP प्रमुख ने हैरानी जताते हुए कहा कि क्या इस बारे में बोलने की जरूरत है? उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अभी कहा कि अगर इस तरह की कवायद नहीं होती तो क्या राष्ट्रपति शासन हटा लिया जाता? अगर राष्ट्रपति शासन नहीं हटा होता तो क्या उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते?’’

शिवसेना के साथ जो हुआ वो पहले कभी नहीं हुआ 

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट वाले धड़े को वास्तविक शिवसेना घोषित करने के चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पवार ने कहा कि राजनीति में मतभेद आम बात है लेकिन देश में ऐसा कभी नहीं हुआ जब पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न शक्ति का दुरुपयोग करने वालों ने छीन लिया हो. वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘जब कांग्रेस में विभाजन हुआ, तो कांग्रेस (आई) और कांग्रेस (एस) नाम के दो संगठन सामने आये। मैं कांग्रेस (एस) का अध्यक्ष था और इंदिरा गांधी कांग्रेस (आई) की प्रमुख थीं. उस वक्त मेरे पास कांग्रेस के नाम का इस्तेमाल करने का अधिकार था. आज के परिदृश्य में पार्टी का नाम और उसका चिह्न दूसरों को दे दिया गया है। भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ.’’

आने वाले चुनाव मे शिवसेना अच्छा प्रदर्शन करेगी 

अपने अनुभव का हवाला देते हुए राकांपा प्रमुख ने कहा कि जब भी सत्ता का अत्यधिक दुरुपयोग होता है और किसी दल को दबाने की कोशिश की जाती है तो जनता उस दल के साथ खड़ी हो जाती है. उन्होंने कहा, “मैंने हाल ही में कई जिलों का दौरा किया और पाया कि हालांकि नेताओं ने शिवसेना छोड़ दी है, लेकिन कट्टर शिव सैनिक (पार्टी कार्यकर्ता) अब भी उद्धव ठाकरे के साथ हैं और यह चुनाव में साबित हो जाएगा।”

पवार ने न्यायालय पर टिप्पणी करने से इंकार किया 

पवार ने कहा, ‘‘निर्णय किसने लिया? क्या यह (चुनाव) आयोग था, या कोई है जो आयोग का मार्गदर्शन कर रहा है? इस तरह के फैसले अतीत में नहीं किए गए थे. इसके पीछे किसी बड़ी ताकत की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है.’’एनसीपी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस मामले में शीर्ष अदालत का फैसला क्या हो सकता है। उन्होंने कहा, “यह न्यायपालिका है और हम न्यायपालिका में विश्वास करते हैं।”

भाषा इनपुट के साथ.

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