मोदी सरकार के तीन साल: सुरक्षा अब भी बड़ा सवाल

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नयी दिल्ली : पिछले साल जब मोदी सरकार ने दो साल पूरे किये थे, तब आंतरिक सुरक्षा के मोरचे पर स्थिति ठीक थी, लेकिन अब कुछ बेकाबू होता दिख रहा है. पिछले साल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में अमन-चैन नहीं है.तीन साल बाद भी देश में मोदी लहर, […]

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नयी दिल्ली : पिछले साल जब मोदी सरकार ने दो साल पूरे किये थे, तब आंतरिक सुरक्षा के मोरचे पर स्थिति ठीक थी, लेकिन अब कुछ बेकाबू होता दिख रहा है. पिछले साल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में अमन-चैन नहीं है.

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सितंबर में हुई सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तानी सेना को कुछ झटका जरूर लगा था, पर घाटी में अलगाववाद भड़काने व आतंकियों को शह देने की उसकी रणनीति बदस्तूर जारी है. भारत ने कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाया है, लेकिन घाटी में लोगों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में निराशाजनक रवैया रहा है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह की निगरानी में 80 हजार करोड़ के सहायता पैकेज के वितरण का काम हो रहा है. जम्मू-कश्मीर के लिए इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में की थी.

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आंतरिक सुरक्षा के लिए माओवाद बड़ा खतरा बना हुआ. पिछले चार-पांच महीनों में उग्रवादी हमलों में मरनेवाले अर्द्ध सैनिक बलों की संख्या में भारी इजाफा हो गया है. गृह मंत्रालय ने भारत में पैर फैलाने की इसलामिक स्टेट की कोशिशों पर अंकुश लगाया है. माना जाता है कि कम-से-कम 23 भारतीय इस गिरोह में शामिल हो चुके हैं. करीब 30 ऐसे लोगों को देश छोड़ने से पहले ही पकड़ा गया है. पूर्वोत्तर में हिंसा का मौजूदा स्तर बीते दो दशकों में सबसे कम है.

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खास बातें

-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 89 फीसदी की बढ़ोत्तरी. सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने में 82 फीसदी की तेजी आयी है. सीमा पार से घुसपैठ की घटना 31 फीसदी बढ़ी है.

-अधिकारियों को खरीद और निर्णय लेने के अधिकार दिये गये

-रक्षा मंत्रालय से संबंधित कई निर्णय लिये गये, जिसमें 21 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन देना महत्वपूर्ण है.

-चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद से लेकर अंतरिक्ष, साइबर जगत और विशेष कार्रवाई के लिए तीनों सेनाओं का कमांड बनाने तक तथा रक्षा उद्योग की खराब स्थिति में सुधार जैसे मसले लंबित हैं.

-रक्षा मामलों में निर्णय लेने में तेजी सरकार की विशेषता रही है. तीन सालों में चार लाख करोड़ से अधिक मूल्य की करीब 140 खरीद प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गयी है.

-करीब 150 ठेके भी स्वीकृत हुए हैं जिनकी लागत दो लाख करोड़ है.

-2017-18 का रक्षा बजट 2.74 लाख करोड़ का है.

नक्सली हमला

-2014 में 128 नागरिक, 87 सुरक्षाकर्मी और 99 उग्रवादी मारे गये थे.

-2015 में 93 नागरिक, 57 सुरक्षाकर्मी और 101 उग्रवादी मारे गये थे.

-2016 में 123 नागरिक, 66 सुरक्षाकर्मी व 244 उग्रवादी मारे गये थे.

-2017 : 21 मई तक 51 नागरिक, 61 सुरक्षाकर्मी और 66 नक्सली मारे जा चुके हैं.

जब से भाजपा सरकार सत्ता में आयी है, तब से आतंकवाद और उग्रवाद बढ़ा है. सरकार के पास माओवादियों से लड़ने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है. कश्मीर में हालात बदतर हो चुके हैं.
रणदीप सुरजेवाला, नेता, कांग्रेस


एक तरफ मोदी सरकार विकास कार्यों को कर रही है, और दूसरी तरफ जहां भी खतरा है, वहां सर्जिकल स्ट्राइक की जा रही है और हमारे देश की सेना का मनोबल बढ़ाया जा रहा है.
अमित शाह, अध्यक्ष, भाजपा

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