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यूपी, झारखंड समेत छह राज्यों के गृह सचिवों को समन, पूछा क्यों नहीं हुई नियुक्तियां

Updated at : 17 Apr 2017 7:59 PM (IST)
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यूपी, झारखंड समेत छह राज्यों के गृह सचिवों को समन, पूछा क्यों नहीं हुई  नियुक्तियां

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों के गृह सचिवों या अधिकृत संयुक्त सचिवों को निजी रुप से अगले हफ्ते पेश होकर राज्यों के पुलिस बलों में लंबे समय से लंबित रिक्तियों को भरने के लिए एक निश्चित खाका पेश करने को कहा. न्यायालय ने राज्यों के पुलिस विभागों में […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों के गृह सचिवों या अधिकृत संयुक्त सचिवों को निजी रुप से अगले हफ्ते पेश होकर राज्यों के पुलिस बलों में लंबे समय से लंबित रिक्तियों को भरने के लिए एक निश्चित खाका पेश करने को कहा. न्यायालय ने राज्यों के पुलिस विभागों में बडी संख्या में रिक्त पदों पर गहरी चिंता जताई और कहा, ‘‘हम 2013 से ही आपको (राज्यों) रिक्तियां भरने को कह रहे हैं लेकिन आप कुछ नहीं कर रहे हैं.’ इन राज्यों में झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने आंकडों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 1.51 लाख रिक्तियां हैं जबकि पश्चिम बंगाल 37,325, कर्नाटक में 24,899, झारखंड में 26,303, बिहार में 34,500 और तमिलनाडु में 19,803 पद रिक्त हैं. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एस के कौल भी इस पीठ में शामिल हैं.

पीठ ने शुरु में इन राज्यों के वकीलों से रिक्तियां भरने के लिए अब तक उठाए गए कदमों के बारे में बताने को कहा. जवाबों से असंतुष्ट होने के बाद पीठ ने गृह सचिवों या गृह सचिव द्वारा अधिकृत ऐसे अधिकारियों को सम्मन करने का फैसला किया जिनका रैंक संयुक्त सचिव पद से नीचे नहीं होना चाहिए। पीठ ने उनसे 21 अपै्रल को व्यक्तिगत रुप से पेश होने तथा रिक्तियों को भरने के विषय से निपटने में मदद करने को कहा.
पीठ ने उत्तर प्रदेश के वकील से पूछा, ‘‘ऐसा क्यों हो रहा है.’ इसके बाद पीठ ने तमिलनाडु के इस कथन पर नाराजगी जतायी कि रिक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं. पीठ ने कहा, ‘विज्ञापन देना पहला कदम है. 2013 से आपने (तमिलनाडु) पहला कदम उठाया है.’
न्यायालय ने कहा कि गृह सचिवों द्वारा अधिकृत अधिकारियों का रैंक संयुक्त सचिव पद से नीचे नहीं होना चाहिए. न्यायालय ने मनीष कुमार की याचिका की सुनवाई अब 21 अप्रैल के लिये निर्धारित की है. इसके पहले न्यायालय ने सभी राज्यों के गृह सचिवों को निर्देश दिया था कि वे हलफनामा दाखिल कर पुलिस सेवा में सभी स्तरों पर रिक्तियों का ब्यौरा दें. याचिकाकर्ता ने पीठ के सामने दावा किया था कि सभी राज्यों में सभी स्तरों पर पुलिस सेवाओं में बडी संख्या में पद खाली हैं .
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