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जेएनयू मामला : पुलिस ने लिया यूटर्न, कन्हैया की जमानत याचिका का विरोध किया

Updated at : 23 Feb 2016 7:21 PM (IST)
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जेएनयू मामला : पुलिस ने लिया यूटर्न, कन्हैया की जमानत याचिका का विरोध किया

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने आज पूरी तरह पलटी मारते हुए देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका का विरोध किया और दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से कहा कि वह उस मामले की जांच की स्थिति रिपोर्ट कल तक अदालत में दायर करे. पिछले सप्ताह […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने आज पूरी तरह पलटी मारते हुए देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका का विरोध किया और दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से कहा कि वह उस मामले की जांच की स्थिति रिपोर्ट कल तक अदालत में दायर करे.
पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार आज जब मामला उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आया तो पुलिस का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायाधीश प्रतिभा रानी को बताया कि वे कन्हैया की जमानत याचिका का विरोध कर रहे हैं.
दिल्ली के पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने आज कन्हैया कुमार की जमानत याचिका का विरोध नहीं करने के अपने पहले के रुख से यूटर्न ले लिया और कहा कि यह ‘परिस्थितियों में बदलाव के कारण हुआ है. ‘ बस्सी ने पहले कहा था कि पुलिस कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेगी क्योंकि उसके जैसे एक नौजवान को दूसरा मौका मिलना चाहिए.
बहरहाल, उन्होंने आज अपने रुख में बदलाव को जायज ठहराते हुए कहा, ‘‘जिन हालात में मैंने यह कहा था वे पूरी तरह बदल चुके हैं.” बस्सी ने कहा कि कन्हैया ने उस वक्त अपनी ओर से पछतावे का परिचय दिया था जब उसने अदालत में पेश होने से पहले एक अपील जारी की थी हालांकि बाद उसने ऐसी कोई अपील जारी करने से इंकार किया था और कुछ ऐसे आरोप लगाए जो ‘गलत’ थे. उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात की वाजिब चिंता है कि अगर वह जमानत पर बाहर आता है तो वह जांच पर असर डालने वाला है और गवाहों को प्रभावित करने वाला है.
वह ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकता है जो दंडीय कानूनों के विरुद्ध हैं. इसलिए हमने जमानत याचिका का विरोध किया है.” उधर, सुबह साढे दस बजे न्यायाधीश प्रतिभा रानी के समक्ष सुनवाई शुरु होने पर पीठ ने कहा, ‘‘क्या आप स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर रहे हैं? यदि आपको पता था तो आपको ऐसा करना चाहिए था.” तब पीठ ने कहा, ‘‘स्थिति रिपोर्ट का क्या हुआ? यदि आपके पास स्थिति रिपोर्ट नहीं है तो मैं आगे कार्यवाही नहीं करुंगी. अपने जांच अधिकारी से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहिए.”
एएसजी मेहता ने उच्च न्यायालय की पीठ को बताया कि वे सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दायर करेंगे क्योंकि ‘‘यह आरोपपत्र से पहले की जमानत है और स्थिति रिपोर्ट आरोपी को नहीं दिखाई जा सकती.” इस पर पीठ ने कहा, ‘‘मुझे यह सीलबंद लिफाफे में नहीं चाहिए. आपको इसे दायर करना होगा. नोटिस जारी कीजिए. कल तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल कीजिए।” बहरहाल, पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्थिति रिपोर्ट जमानत तक ही सीमित होगी.
दिल्ली सरकार के वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल मेहता और संजय जैन तथा वकील अनिल सोनी की मौजूदगी का विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस मामले में आने से पहले उन्हें इस बारे में अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी.
मेहरा ने पीठ को बताया, ‘‘यदि उनके पास अधिसूचना नहीं है तो वे इस अदालत के समक्ष खडे नहीं रह सकते.” इसपर एएसजी जैन ने कहा, ‘‘यदि एएसजी इस मामले में पेश हो रहे हैं तो आपका इस मुद्दे पर हस्तक्षेप का कोई मतलब नहीं बनता.” तब पीठ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘इस मुद्दे पर लडिए मत.
मैं तभी कार्यवाही आगे बढाउंगी, जब स्थिति रिपोर्ट दायर की जाएगी.” हालांकि अधिवक्ता मेहरा ने कहा कि उन्होंने ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघी है और मैं ऐसा तब तक नहीं होने दूंगा, जब तक अदालत आदेश नहीं पारित कर देती. मुझे यह जिम्मेदारी इस उच्च न्यायालय ने ही सौंपी है.
मेहरा ने यह भी दावा किया कि इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा दायर की जानी चाहिए और उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना होगा क्योंकि उन्होंने पहले कहा था कि दिल्ली पुलिस कन्हैया की जमानत याचिका का विरोध नहीं करेगी. कन्हैया का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और रेबेका जॉन तथा वकील वृंदा ग्रोवर और सुशील बजाज अदालत कक्ष में मौजूद थे. सुनवाई लगभग 10 मिनट चली.
बीते 15 फरवरी और 17 फरवरी को पटियाला हाउस अदालत में हिंसा की घटनाओं के चलते आज जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम देखने को मिले. पटियाला हाउस अदालत में उपद्रवी वकीलों ने सुनवाई के दौरान कन्हैया, वादियों और पत्रकारों को पीटा था.
कन्हैया ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी. उच्चतम न्यायालय ने यह कहते हुए उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था कि इससे एक ‘‘खतरनाक उदाहरण” बन जाएगा. अपनी याचिका में कन्हैया ने दावा किया कि उसे इस मामले में ‘झूठे फंसाया’ गया है और उसने कोई राष्ट्र विरोधी नारे नहीं लगाए.
जेएनयू छात्र संघ के नेता ने दावा किया कि उसे एक ऐसी प्राथमिकी के आधार पर गलत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे जुड़ा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं था जो इस गंभीर आरोप के लिए उसपर मामला दर्ज करवा सकता हो. कन्हैया को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया गया और पटियाला हाउस अदालतों में हिंसा के बीच 17 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
अपनी याचिका में उसने यह भी दावा किया कि उसके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. उसने कहा कि नौ फरवरी को जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान उसने कभी कोई राष्ट्रविरोधी नारा नहीं लगाया. बीते दो मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए कन्हैया ने तिहाड जेल में अपनी जिंदगी को खतरे में बताते हुए सीधे शीर्ष अदालत से जमानत मांगी थी.
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