मोदी कैबिनेट में होगा फेरबदल, जेटली से छिनेगा वित्त मंत्रालय!

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jan 2016 10:59 AM

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नयी दिल्‍ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों में आपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबल कर सकते हैं. विरोधियों को खुश करने और आर्थिक गति को तेज करने के लिए मोदी नये चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं. इस क्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली से वित्त मंत्रालय छिन सकता है. अंग्रेजी समाचार एजेंसी […]

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नयी दिल्‍ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों में आपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबल कर सकते हैं. विरोधियों को खुश करने और आर्थिक गति को तेज करने के लिए मोदी नये चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं. इस क्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली से वित्त मंत्रालय छिन सकता है. अंग्रेजी समाचार एजेंसी रायटर्स की खबर के अनुसार अरुण जेटली लगातार आर्थिक मोर्चे पर विफल रहे हैं.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी आर्थिक क्षेत्र में देश की गति से खुश नहीं है और मोदी से बड़े बदलाव की उम्‍मीद कर रहा है. रायटर्स ने लिखा है कि जेटली कर सुधार सहित बैंकों के एनपीए और नये रोजगार सृजित करने में नाकाम रहे हैं. शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति के लिए भी विपक्ष वित्तमंत्री को ही निशाना बना रहा है.

वरिष्ठ सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए रायटर्स ने कहा है कि सरकार तेजी से आर्थिक विकास के लिए ये बदलाव कर सकती है और वित्त मंत्रालय का जिम्‍मा पीयूष गोयल को दे सकती है. हालांकि पार्टी के कदावर नेताओं का कहना है कि अभी इस बारे में कुछ भी निर्णय नहीं लिया गया है. मंत्रिमंडल में फरबदल प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है. एजेंसी का कहना है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह शायद यह फेरबदल 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता पर पकड़ के लिए करना चाहता है. देखा जायेगा तो नरेंद्र मोदी राज्‍यसभा में बहुमत हासिल करने के लिए विधानसभा चुनावों में भी बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं. लोकसभा चुनाव के बाद दो विधानसभा चुनावों (दिल्‍ली और बिहार) में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. जबकि दोनों चुनावों के स्‍टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे हैं.

संघ की नाराजगी एक वजह

समाचार एजेंसी रायटर्स का कहना है कि कुछ मंत्रियों के कामकाज से संघ भी नाराज चल रहा है. आर्थिक मोर्चे पर सरकार को जितनी सफलता मिलनी चाहिए थी. वित्तमंत्री अरुण जेटली उतनी सफलता दिलाने में नाकाम रहे. नये रोजगारों के सृजन में भी सरकार अपेक्षाकृत खरी नहीं उतरी. साथ ही बैंकों का एनपीए और आर्थिक सुधार को मुख्‍य मुद्दा बनाकर जेटली पर विपक्ष के हमले से भी संघ को परेशानी हो रही है. दो विधानसभा चुनावों में हार के बाद संघ की समीक्षा में राष्ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट दी गयी, लेकिन सरकार के कामकाज पर सवाल उठाये गये. ऐसे में नरेंद्र मोदी के भाषण और सरकार के काम को एक लाइन में लाने के लिए सभी मंत्रालयों सुधारात्‍मक कार्य अपेक्षित है.रायटर्स के अनुसार,मंत्रिमंडल में फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

अमित शाह फिर बन सकते हैं अध्‍यक्ष

दो दिन बाद 24 जनवरी को भाजपा अध्‍यक्ष का चुनाव है. कयास लगाये जा रहे रहे हैं नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमित शाह को पार्टी के अध्‍यक्ष पद पर देखना चाहते हैं. उत्तर प्रदेशमें 73 सीटें पार्टी की झोली में आने का श्रेयनरेंद्र मोदी अमित शाह को ही देते हैं. ऐसे में 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी अमित शाह को अध्‍यक्ष पद पर देखना चाहते हैं. खबरेंआ रही हैं कि नरेंद्र मोदी पार्टी अध्‍यक्ष के चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं. लेकिन तीन बड़े मंत्रालयों रक्षा, गृह और वित्त मंत्रालय में किसी भी प्रकार के बदलाव की बात नहीं कही गयी थी. रायटर्स के हवाले से कहा गया है कि वित्तमंत्री जेटली को वित्त विभाग से हटाकर रखा मंत्रालय का जिम्‍मा सौंपा जा सकता है. वहीं पीयूष गोयल को वित्त मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि एजेंसी ने यह भी कहा है कि पार्टी अध्‍यक्ष के चुनाव के तुरंत बाद कोई बदलाव नहीं होगा और जेटली को फरवरी के अंत में आम बजट के बाद रक्षा मंत्रालय का जिम्‍मा सौंपा जायेगा.

अच्‍छी दोस्‍ती है मोदी और जेटली के बीच

2014 लोकसभा चुनाव में अमृतसर से चुनाव हार चुके अरुण जेटली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्‍ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव हारने के बाद भी नरेंद्र मोदी ने जेटली को एक अहम मंत्रालय सौंपा गया. जेटलीमोदी के गृह राज्य गुजरात से सालों से राज्यसभा सदस्य हैं.वित्त मंत्री जेटली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता हैं. अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में जेटली विनिवेश, कानून और कंपनी अफेयर के मंत्री भी रह चुके हैं. 2000 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें शिपिंग मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी थी लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार के बाद वो अपने पुराने वकालत के पेशे में लौट आए थे. 2006 में जब जेटली पहली बार गुजरात से राज्‍यसभा सांसद चुने गये थे तब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे. डीडीसीए घोटाले में जेटली का नाम आने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्‍हें क्‍लीन चिट दी और कहा कि हवाला में जैसे आडवाणीपाक-साफ निकले उसी प्रकार जेटली भी डीडीसीए केस मेंपाक-साफसाबितहोंगे.

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