डी के शिवकुमार: कांग्रेस के संकटमोचक से कर्नाटक के मुख्यमंत्री तक

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 30 May 2026 8:57 PM

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कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक दल के नेता डीके शिवकुमार, फोटो पीटीआई

DK Shivakumar: डोड्डा अलाहल्ली गांव की धूल भरी गलियों से लेकर कर्नाटक के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक, डीके शिवकुमार की चार दशक लंबी यात्रा उनके संघर्ष, विजय और कांग्रेस के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाती है.

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DK Shivakumar: शिवकुमार को ‘कनकपुरा बंदे’ के नाम से जाना जाता है – यानी कनकपुरा की ग्रेनाइट चट्टान – यह वही विधानसभा क्षेत्र है जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के संकट मोचक के रूप में भी जाना जाता है. उन्हें राजनीति में पहला बड़ा मौका 1985 में मिला जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सथानूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, हालांकि वे असफल रहे. चार साल बाद, उन्होंने उस निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की और 1989 में विधानसभा में प्रवेश किया. तब से उन्होंने बिना किसी रुकावट के लगातार आठ विधानसभा चुनाव जीते हैं.

शिवकुमार ने वोक्कालिगा नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई

पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने खुद को कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वोक्कालिगा नेता के रूप में स्थापित किया है. वोक्कालिगा कर्नाटक के प्रमुख कृषि समुदायों में से एक हैं. कांग्रेस आलाकमान ने 2017 में शिवकुमार के राजनीतिक प्रबंधन कौशल की परीक्षा ली, जब उन्हें राज्यसभा चुनावों से पहले बेंगलुरु में गुजरात के 42 कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई ताकि क्रॉस वोटिंग को रोका जा सके. वह पार्टी नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतरे और गुजरात से कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल ने जीत दर्ज की.

2020 में शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया

पार्टी ने 2020 में शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया. शिवकुमार ने कर्नाटक में कांग्रेस के लिए एक कठिन दौर में कार्यभार संभाला. पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन किया था, और 2019 के लोकसभा चुनावों में यह झटका और गहरा गया, जब नरेंद्र मोदी लहर के बीच कांग्रेस राज्य की 28 सीटों में से केवल एक सीट जीतने में कामयाब रही. भाजपा ने 26 सीटें जीतीं जिनमें मांड्या से भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालता अंबरीश की सीट भी शामिल थी. कांग्रेस को एकमात्र जीत बेंगलुरु ग्रामीण से मिली, जिसे शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने जीता.

डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस ने कर्नाटक की सत्ता में धमाकेदार वापसी की

कांग्रेस ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, और 224 सदस्यीय सदन में 134 सीटें जीतीं. शिवकुमार के अनुसार, निर्दलीय विधायकों के समर्थन से पार्टी की प्रभावी संख्या बाद में बढ़कर 140 हो गई. 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्हें एक और महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करना पड़ा, जहां उन्होंने 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस की एक सीट की संख्या को 2024 में नौ सीटों तक बढ़ाकर एक बार फिर अपनी राजनीतिक सूझबूझ का प्रदर्शन किया. 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद, शिवकुमार को बेंगलुरु विकास और जल संसाधन मंत्रालय का प्रभार सौंपते हुए उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था.

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान की शुरुआत हुई

कुछ नेताओं द्वारा राज्य इकाई के नेतृत्व में बदलाव की मांग के बावजूद, वे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहे. कांग्रेस द्वारा 2023 में सरकार बनाने के कुछ ही समय बाद, सत्ता-साझाकरण व्यवस्था की खबरें सामने आईं, जिसमें सिद्धरमैया पांच साल के कार्यकाल के पहले आधे हिस्से के लिए मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करेंगे, जिसके बाद शिवकुमार पदभार संभालेंगे. दोनों नेताओं ने इस दावे की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया.

कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद कर्नाटक में हुआ नेतृत्व परिवर्तन

20 नवंबर, 2025 को कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद, नेतृत्व परिवर्तन और सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर अटकलें तेज हो गईं. अंततः, शिवकुमार शनिवार को यहां कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने गए और वे तीन जून को कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के लिए तैयार हैं. बेंगलुरु दक्षिण जिले के कनकपुरा कस्बे के पास डोड्डा अलाहल्ली गांव में केम्पेगौड़ा और गौराम्मा के घर 15 मई, 1962 को जन्मे शिवकुमार ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान राजनीति में प्रवेश किया. 1993 में शिवकुमार ने उषा से शादी की. इस दंपति की दो बेटियां, ऐश्वर्या और आभरना और एक बेटा, आकाश है.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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