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नये अवसरों का क्षेत्र है अफ्रीका :सुषमा

Updated at : 25 Oct 2015 3:54 PM (IST)
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नये अवसरों का क्षेत्र है अफ्रीका :सुषमा

नयी दिल्ली: भारत-अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक शिखरवार्ता की कल यहां शुरुआत होने से एक दिन पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अफ्रीका को नये अवसरों का क्षेत्र बताते हुए आज कहा कि भारत इस महाद्वीप के आर्थिक विकास के प्रति ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसके एकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है. विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘भारत […]

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नयी दिल्ली: भारत-अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक शिखरवार्ता की कल यहां शुरुआत होने से एक दिन पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अफ्रीका को नये अवसरों का क्षेत्र बताते हुए आज कहा कि भारत इस महाद्वीप के आर्थिक विकास के प्रति ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसके एकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है.

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘भारत अफ्रीका को अपने विस्तारित पडोस के रूप में देखता है. अफ्रीका के साथ हमारी साझेदारी अद्वितीय है और प्राचीन समुद्री यात्रियों, व्यापारियों, विद्वानों तथा भिक्षुओं के माध्यम से बने हमारे सभ्यतागत संपकोंर् के समय की है.’ उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के कूटनीतिक क्षेत्र में भारत-अफ्रीका मैत्री के प्रति समर्पित एक रोज गार्डन का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘आज एशिया में सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने के नाते भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को अत्यंत महत्व दे रहा है.
‘ व्यापार और निवेश को महत्व देते हुए सुषमा ने अफ्रीका को नये अवसरों का क्षेत्र बताया और कहा, ‘‘हम अफ्रीका के आर्थिक विकास मंे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसके एकीकरण में दिलचस्पी रखते हैं.’ महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अफ्रीकी महाद्वीप और भारत विविध सोच के साथ आपस में जुडे रहे हैं. इनमें से एक दर्शन गांधी और मंडेला का है. दोनों ने अपने-अपने राष्ट्रों को अपने मानवतावादी सिद्धांतों और दर्शन के माध्यम से आजादी दिलाई’ मंडेला ने कहा था, ‘‘भारत महात्मा को जन्म देने वाला देश है, दक्षिण अफ्रीका उन्हें अपनाने वाला देश है.’ इस टिप्पणी के हवाले से सुषमा ने कहा कि महान दक्षिण अफ्रीकी नेता ने अपने आंदोलन, कॅरियर और जीवन पर गांधीजी के आदशोंर् और सिद्धांतों के प्रभाव से अपनी उपलब्धियों को माना था.
सुषमा ने कहा कि ‘मानव सभ्यता की विकास भूमि’ के रूप में अफ्रीका और ‘प्राचीन सभ्यता’ के रूप में भारत, दोनों की अपनी विशिष्टता है और इसके साथ ही ऐतिहासिक अनुभवों, लक्ष्यों, दृष्टिकोणों तथा अवरोधों में समानता है. यह क्षेत्र शांति, गुट निरपेक्षता और आर्थिक न्याय के आदशोंर् के प्रति समान प्रतिबद्धता साझा करता है.समारोह में शामिल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपनिवेशवाद और अन्याय के खिलाफ भारत और अफ्रीका के तथा उनके नेताओं नेल्सन मंडेला एवं महात्मा गांधी के संघर्ष के साझा इतिहास का उल्लेख किया.
केजरीवाल ने दिल्ली और अफ्रीकी शहरों के सामने मौजूद एक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त रुप से रणनीति बनाने का आह्वान किया.उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह की चुनौतियां दिल्ली के सामने एक शहर के रुप में हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि अफ्रीकी महाद्वीप के कई देश ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. मैं ऐसे अवसर की राह देख रहा हूं जहां हम सब मिलकर इन चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने को आगे आ सकें।’ इस अवसर पर मौजूद अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने गार्डन में गुलाबों की कलमों का रोपण किया.
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