आफत में राहत : एक पखवाड़े में कोरोना के हॉटस्पॉट जिलों की फेहरिस्त से 42 जिले हुए बाहर

Updated at : 29 Apr 2020 8:23 PM (IST)
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आफत में राहत : एक पखवाड़े में कोरोना के हॉटस्पॉट जिलों की फेहरिस्त से 42 जिले हुए बाहर

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, देश में लॉकडाउन दौरान संक्रमण की अधिकता वाले जिलों के रूप में चिह्नित हॉटस्पॉट जिलों की संख्या में पिछले 15 दिनों में 170 से घटकर 128 पर आ गयी है.

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नयी दिल्ली : कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए देश में जारी देशव्यापी अभियान के दौरान पिछले एक पखवाड़े में मिलेजुले परिणाम मिले हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, देश में लॉकडाउन दौरान संक्रमण की अधिकता वाले जिलों के रूप में चिह्नित हॉटस्पॉट जिलों की संख्या में पिछले 15 दिनों में 170 से घटकर 128 पर आ गयी है, जबकि संक्रमण मुक्त जिलों के रूप में चिह्नित किये गये ग्रीन जोन की संख्या इस अवधि में 325 से घटकर 307 पर आ गयी है.

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ऑरिेंज जोन जिलों की संख्या में 90 का इजाफा : मंत्रालय द्वारा कोरोना संक्रमण रोधी अभियान की समीक्षा के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में पेश आंकड़ों के अनुसार, सीमित संक्रमण वाले जिलों के रूप में चिह्नित ऑरेंज जिलों की संख्या 15 दिनों में 207 से बढ़कर 297 हो गयी है. कोरोना के खिलाफ अभियान से जुड़े अधिकारी हॉटस्पॉट जिलों में 42 की कमी आने और ऑरेंज जोन की संख्या में इजाफे को सकारात्मक संकेत मान रहे हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीन जोन में जिलों का किया था वर्गीकरण : स्वास्थ्य मंत्रालय ने लॉकडाउन के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद 15 अप्रैल को संक्रमण फैलने की दर के मुताबिक जिलों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए अधिक संक्रमण वाले जिलों को हॉटस्पॉट या रेड जोन, सीमित संक्रमण वाले जिलों को ऑरेंज जोन और संक्रमण मुक्त जिलों को ग्रीन जोन में श्रेणीबद्ध किया था. उस समय 25 राज्यों के 170 जिले रेड जोन में शामिल किये गये थे. इन जिलों में 123 इलाके हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किये गये थे, जबकि ऑरेंज जोन में शामिल जिलों की संख्या 207 और ग्रीन जोन में शामिल जिलों की संख्या 325 थी.

ऐसे तय होता है ग्रीन जोन एरिया : मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक, किसी हॉटस्पॉट जिले में 14 दिनों तक संक्रमण का एक भी मामला नहीं मिलने पर उसे ऑरेंज जोन में 28 दिन तक संक्रमण कोई मामला सामने नहीं आने पर ग्रीन जोन में शामिल किया जाता है. डॉ हर्षवर्धन ने बैठक में ग्रीन जोन में शामिल जिलों की संख्या में कमी आने पर चिंता व्यक्त करते हुए रेड और ऑरेंज जोन को तेजी से ग्रीन जोन में तब्दील करने के उपाय लागू करने को कहा है.

76 जिलों में सात दिनों से नहीं आया है कोई नया केस : हालांकि, उन्होंने संक्रमण वाले इलाकों की स्थिति में लगातार सुधार होने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश में 76 जिले ऐसे हैं, जहां पिछले सात दिन से कोई नया मामला नहीं आया है. वहीं, 45 जिलों में पिछले 14 दिन से और 39 जिलों में पिछले 21 दिन में कोई नया मामला सामने नहीं आया है.

17 जिले में 28 दिन में नया मामला नहीं : मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 17 जिले ऐसे हो गये हैं जहां पिछले 28 दिन में संक्रमण को कोई नया मामला नहीं मिला है. उन्होंने इसे संक्रमण रोधी अभियान की उपलब्धि बताते हुए कहा कि मंगलवार तक संक्रमण के मामले राष्ट्रीय स्तर पर दोगुना होने की गति तीन दिन से बढ़कर 10.9 दिन पर आ गयी है. उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को राज्य सरकारों के साथ मिलकर संक्रमण के दायरे को सीमित करने के उपाय तेज करने को कहा. संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में हैदराबाद, पुणे, जयपुर, इंदौर और अहमदाबाद के अलावा मुंबई और दिल्ली के 15 जिले शामिल हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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