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वेंकैया नायडू के ''शैतान के प्रवचन'' बयान पर आज संसद में हो सकता है हंगामा

Updated at : 22 Apr 2015 7:45 AM (IST)
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वेंकैया नायडू के ''शैतान के प्रवचन'' बयान पर आज संसद में हो सकता है हंगामा

नयी दिल्ली : संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू के उस बयान पर आज संसद में हंगामा मच सकता है जिसमें उन्होंने कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लोकसभा में दिये गये बयान को शैतान का प्रवचन देने जैसा बताया था. 23 अप्रैल से राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो रही है. कांग्रेस नेताओं ने वेकैया […]

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नयी दिल्ली : संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू के उस बयान पर आज संसद में हंगामा मच सकता है जिसमें उन्होंने कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लोकसभा में दिये गये बयान को शैतान का प्रवचन देने जैसा बताया था. 23 अप्रैल से राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो रही है. कांग्रेस नेताओं ने वेकैया के इस बयान की जमकर आलोचना की है. उम्मीद जताई जा रहा है कि एम वेंकैया नायडू के इस बयान पर कल राज्यसभा में भी हंगामा हो सकता है.

गिरिराज सिंह के कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी के कारण लोकसभा 21 अप्रैल को बाधित रहा था जिसके बाद खुद केंद्रीयराज्य मंत्री को इस पर सफाई देते हुए अपनी टिप्पणी पर खेद जताना पड़ा था. इसके ठीक एक दिन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिरिराज सिंह से मुलाकात करके उन्हें फटकार लगाई थी हालांकि गिरिराज सिंह ने इससे इनकार किया है.
अब आज वेंकैया नायडू के बयान को लेकर कांग्रेसी नेता सदन में हंगामा मचा सकते हैं. इस तरह नरेंद्र मोदी सरकार अपने नेताओं और मंत्रियों के कारण एक बार फिर घिरती नजर आ रही है.
भूमि विधेयक को लेकर कांग्रेस पर दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए भाजपा ने मंगलवार को कहा कि विपक्षी पार्टी का अध्यादेश पुन: जारी करने की आलोचना करना ‘शैतान के प्रवचन देने’ जैसा है. कांग्रेस शासनकाल के पिछले रिकार्ड को सामने रखते हुए कहा कि उस दौरान रिकार्ड संख्या में अध्यादेश जारी किये गये. ऐसे में विपक्षी दल को यह अधिकार नहीं है कि वह हमारे ऊपर ‘लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाये.
पार्टी ने अपने सांसदों से कहा वे विपक्ष की हकीकत से जनता को अवगत कराएं और परदाफाश करें. संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि अध्यादेश पर विपक्षी पार्टी का रिकार्ड बदतर रहा है. बार- बार अध्यादेश का मार्ग अपनाया. पिछले 50 वर्षो में 456 अध्यादेश जारी किये गये. जवाहर लाल नेहरू के समय में 77 , इंदिरा गांधी के कार्यकाल में तकरीबन 77 और राजीव गांधी के शासनकाल में 35 अध्यादेश जारी किये गये. इतना ही नहीं, माकपा समर्थित संयुक्त मोरचा की सरकार ने 77 अध्यादेश जारी किये. आश्चर्य की बात है कि आज ऐसे लोग अध्यादेश जारी करने पर आपत्ति व्यक्त कर रहे हैं. हमने तो विभिन्न पक्षों से व्यापक विचार -विमर्श भी किया.

गुजरात मॉडल की प्रशंसा

विकास के गुजरात मॉडल का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपकी अपनी सरकार(यूपीए) ने डीआइपीपी के जरिये एक अध्ययन कराया था जिसमें कहा गया कि गुजरात मॉडल सर्वेश्रेष्ठ है. यह 2014 के चुनाव से पहले डीआइपीपी की रिपोर्ट है. डीआइपीपी के अध्ययन के अनुरूप गुजरात की भूमि नीति को सर्वश्रेष्ठ बताये जाने की सुप्रीम कोर्ट द्वारा सराहना करने का जिक्र किया.
क्या आपात काल हमने लगाया
कांग्रेस को अतीत की याद दिलाते हुए वेंकैया ने कहा कि दुष्प्रचार की एक सीमा होती है. 10 बार दोहराने से झूठ कभी भी सच नहीं हो सकता है. हम पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाने से पहले आप यह देंखें कि आपने आपातकाल लगाया था.लाखों को जेल में बंद कर दिया, मीडिया को दबाया. इसे आप क्या कहेंगे. आलोचना करने से पहले कुछ होमवर्क करें. सौ चुहे खाकर बिल्ली चली हज को. हम केवल आपको याद दिलाना चाहते हैं कि आप भी इसे लाये थे.
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