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सीडब्लूजी, कोयला रिपोर्ट से नाम हटाने के लिए संप्रग ने मुझ पर दबाव बनाया: राय

Updated at : 24 Aug 2014 8:49 PM (IST)
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सीडब्लूजी, कोयला रिपोर्ट से नाम हटाने के लिए संप्रग ने मुझ पर दबाव बनाया: राय

नयी दिल्ली: कांग्रेस और खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए नई परेशानी खडी करते हुए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने दावा किया है कि कोलगेट और राष्ट्रमंडल खेल घोटालों से जुडी ऑडिट रिपोर्ट से कुछ नामों को हटाने के लिए संप्रग शासन द्वारा उन पर दवाब डाला गया था. […]

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नयी दिल्ली: कांग्रेस और खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए नई परेशानी खडी करते हुए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने दावा किया है कि कोलगेट और राष्ट्रमंडल खेल घोटालों से जुडी ऑडिट रिपोर्ट से कुछ नामों को हटाने के लिए संप्रग शासन द्वारा उन पर दवाब डाला गया था. राय के इस दावे से एक नया राजनीतिक विवाद खडा हो गया है. राय ने कल दावा किया कि संप्रग गठबंधन के कुछ पदाधिकारियों ने कुछ नेताओं को इस मामले में कुछ नामों को हटाने के लिए काम पर लगाया था.

कांग्रेस ने राय की ईमानदारी पर सवाल खडा किया और उन पर सनसनी फैलाने का आरोप लगाया जबकि भाजपा ने मांग की कि जिन नेताओं ने राय से संपर्क किया कि उनकी पहचान उजागर होनी चाहिए.

राय ने यह दावा भी किया है कि संप्रग के पदाधिकारियों ने उनके कैग बनने से पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में उनके सहयोगी रहे कुछ लोगों को भी नाम हटाने के लिए मुङो मनाने के काम में लगाया था. राय ने अपनी आने वाली किताब ‘नॉट जस्ट एन एकाउंटेंट’ में अपने विचार व्यक्त किये हैं जो अक्तूबर में जारी होगी. इस किताब में उसी तरह संप्रग सरकार को आडे हाथ लिया गया है जिस तरह पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारु, पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह और पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख की किताबों में खुलासे किये गये हैं.

पिछले साल पद छोडने वाले राय ने अपनी रिपोर्ट में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में 1.76 लाख करोड रुपये और कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में 1.86 लाख करोड रपये के नुकसान का आकलन किया था. राय ने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के इतर टिप्पणी की जो सिंह पर भी प्रहार करती हैं.उन्होंने कहा है कि वह इसका ब्यौरा देंगे कि महज पद पर बने रहने की खातिर सिंह ने किस तरह उन फैसलों पर सहमति जताई जिनसे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ.

राय ने कहा, ‘‘सभी में प्रधानमंत्री सबसे पहले हैं. उन्हें आखिरी फैसला करना होता है जो उन्होंने कई बार किया और कई बार नहीं किया. केवल सत्ता में बने रहने के लिए सब कुछ न्योछावर नहीं किया जा सकता. गठबंधन राजनीति की मजबूरी की वेदी पर शासन को कुर्बान नहीं किया जा सकता. मैंने किताब में यही बात लिखी है.’’ आज जब संवाददाता राय से मिलने उनके आवास पर पहुंचे तो उन्होंने मिलने और खबर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने कहा, ‘‘किताब में हर शब्द तथ्यात्मक रुप से सही है. इसका उद्देश्य किसी की छवि खराब करना नहीं है बल्कि भविष्य में शासन और व्यवस्था में सुधार करना है. किताब में इस्तेमाल की गई भाषा इतनी सरल है कि इसे विद्यार्थियों समेत सभी वर्गों के लोग समझ सकें.’’

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