शीतकालीन सत्र : दो दिन के हंगामे के बाद लोकसभा में शांति से चला प्रश्नकाल

Updated at : 20 Nov 2019 1:26 PM (IST)
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शीतकालीन सत्र : दो दिन के हंगामे के बाद लोकसभा में शांति से चला प्रश्नकाल

नयी दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दो दिन लोकसभा में बैठक शुरू होने पर कांग्रेस, द्रमुक और नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी के बाद बुधवार को सदन में प्रश्नकाल शांति से चला. शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी […]

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नयी दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दो दिन लोकसभा में बैठक शुरू होने पर कांग्रेस, द्रमुक और नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी के बाद बुधवार को सदन में प्रश्नकाल शांति से चला. शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और द्रमुक के टी आर बालू ने अपनी-अपनी बात रखने की अनुमति मांगी. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें शून्यकाल में विषय उठाने को कहा.

स्पीकर ने कहा, ‘‘आपका अधिकार है. शून्यकाल में आपको बोलने का मौका दूंगा.” उनके आश्वासन के बाद सदस्य अपने स्थान पर बैठ गये और प्रश्नकाल शुरू हुआ. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में उपस्थित थे. प्रश्न सूची में बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभागों से संबंधित प्रश्न सूचीबद्ध थे.

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत सोमवार को हुई और पहले दो दिन सदन में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न मुद्दों पर हंगामा हुआ. सोमवार को नेशनल कान्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को श्रीनगर में हिरासत में रखे जाने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने लोकसभा में सरकार पर निशाना साधा और लोकसभा अध्यक्ष से सरकार को अब्दुल्ला को तत्काल रिहा करने का आदेश देने का अनुरोध किया. इस मुद्दे पर विरोध जताते हुए कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया.

सोमवार को शिवसेना के सदस्य भी महाराष्ट्र में किसानों के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे. अध्यक्ष बिरला ने नारेबाजी के बीच ही प्रश्नकाल चलाया. शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा की बैठक हंगामे के साथ शुरू हुई और कांग्रेस नेताओं सोनिया, राहुल गांधी से एसपीजी की सुरक्षा वापस लिये जाने के मुद्दे पर कांग्रेस, द्रमुक के सदस्यों ने पूरे प्रश्नकाल में आसन के समीप नारेबाजी की. शून्यकाल में इन दलों के सदस्यों ने इस विषय पर सदन से वाकआउट किया.

मंगलवार को अध्यक्ष बिरला ने आसन के समीप नारेबाजी कर रहे सदस्यों को आगाह करते हुए कहा कि आसन के पास आकर आसन से बातचीत करने की परंपरा पहले रही होगी, लेकिन आगे से सदस्य ऐसा नहीं करें, अन्यथा उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी होगी. बाद में शून्यकाल शुरू होने पर ही नारेबाजी कर रहे सदस्य अपने स्थानों पर गये.

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