अयोध्या विवाद : बाहर से दिखी छुट्टी, अंदर जोरशोर से चला काम, छह वर्किंग डे में इन चार बड़े मामलों पर फैसला दे सकते हैं गोगोई

Updated at : 06 Nov 2019 6:02 AM (IST)
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अयोध्या विवाद : बाहर से दिखी छुट्टी, अंदर जोरशोर से चला काम, छह वर्किंग डे में इन चार बड़े मामलों पर फैसला दे सकते हैं गोगोई

17 नवंबर को रिटायर होंगे सीजेआइ गोगोई, इससे पहले अयोध्या विवाद समेत कई मुद्दों पर दे सकते हैं फैसला आगामी 17 नवंबर को पद से सेवानिवृत्त होने से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा छह वर्किंग डे में चार अहम मामलों का निस्तारण करने की संभावना है.चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अयोध्या […]

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17 नवंबर को रिटायर होंगे सीजेआइ गोगोई, इससे पहले अयोध्या विवाद समेत कई मुद्दों पर दे सकते हैं फैसला
आगामी 17 नवंबर को पद से सेवानिवृत्त होने से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा छह वर्किंग डे में चार अहम मामलों का निस्तारण करने की संभावना है.चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद संपत्ति विवाद, राफेल विमान घोटाले में शीर्ष अदालत के निर्णय के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका, सबरीमाला मंदिर जैसे चर्चित मामले लंबित हैं.
इन सभी मामलों को निबटाने के लिए गोगोइ को अपने 12 दिन के शेष कार्यकाल में अवकाश के चलते महज छह दिन का ही समय मिलेगा. चार नवंबर से सुप्रीम कोर्ट में दोबारा कामकाज शुरू होने के बाद 11 और 12 को फिर से सरकारी अवकाश हैं, जबकि बीच में शनिवार-रविवार के भी अवकाश रहेंगे. इस तरह से देखा जाये तो छह कार्यदिवस में गोगोइ के सामने सबसे अहम चुनौती अयोध्या विवाद में सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाने का है. इस राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील मुद्दे में 40 दिन की लगातार मैराथन सुनवाई के बाद 16 अक्तूबर को शीर्ष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था.
इस मामले में 2010 में इलाहाबाद हाइकोर्ट की तरफ से सुनाये गये उस फैसले के खिलाफ 14 अपील शीर्ष अदालत में दाखिल की गयी थी, जिसमें हाइकोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच बराबर बांट दिया था. फैसला सुनाने के लिए ही गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उनकी सेवानिवृत्ति से एक महीना पहले सुनवाई पूरा हो जाने की घोषणा की थी.
12 दिन का बचा है कार्यकाल, अवकाश के चलते छह दिन ही होगा काम
इन मुद्दों पर भी आ सकता है फैसला
पीएम मोदी के खिलाफ ‘चौकीदार चोर है’ नारे में गलत तरीके से शीर्ष अदालत के निर्णय का इस्तेमाल करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका पर देना है निर्णय.
केरल के सबरीमला मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश दिये जाने के शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा के लिए दाखिल याचिकाओं पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ को करना है विचार.
दिल्ली हाइकोर्ट की तरफ से दिया गया सीजेआइ ऑफिस को सूचना अधिकार कानून के दायरे में लाने के आदेश के खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल व सेंट्रल पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर की तरफ से दाखिल तीन याचिकाओं पर चार अप्रैल को सुरक्षित रखे गए निर्णय को सुनाना.
राफेल मामले में 14 दिसंबर को शीर्ष अदालत में सुनाये गये निर्णय की समीक्षा की मांग के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा व अरुण शौरी समेत कई अन्य लोगों की तरफ से दाखिल याचिका पर लेना है निर्णय.
बाहर से दिखी छुट्टी, अंदर जोरशोर से चला काम
छुट्टियों के दौरान सुप्रीम कोर्ट में बाहर से छुट्टी दिख रही थी लेकिन अंदर पूरे जोरों से काम चल रहा था और फैसले लिखने की प्रक्रिया अब भी जारी है. जजों का पूरा लिपीकीय और सचिवालय स्टाफ इस काम में लगा है. छुट्टी भी उसी स्टाफ को दी गयी जिसे बहुत जरूरत है. सूत्रों के अनुसार, इस मामले में तीन फैसले आ सकते हैं, ये फैसले कैसे होंगे यह नहीं कहा जा सकता. वहीं एक सूत्र ने कहा कि फैसला सर्वसम्मति से एक ही आयेगा, लेकिन उसमें जज अपनी अपनी राय अलग से व्यक्त कर सकते हैं.
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