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इसरो ने चांद पर खोज निकाला लैंडर विक्रम, संपर्क की कोशिश

Updated at : 09 Sep 2019 5:47 AM (IST)
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इसरो ने चांद पर खोज निकाला लैंडर विक्रम, संपर्क की कोशिश

बेंगलुरु : चांद के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचने की भारतीय वैज्ञानिकों की कोशिशें जारी हैं. इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का पता लगाने में सफलता भी हासिल की है़ इसरो चीफ डॉ के सिवन ने कहा कि चंद्रमा पर लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन का पता लग चुका है. ऑर्बिटर ने लैंडर की कुछ तस्वीरें […]

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बेंगलुरु : चांद के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचने की भारतीय वैज्ञानिकों की कोशिशें जारी हैं. इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का पता लगाने में सफलता भी हासिल की है़ इसरो चीफ डॉ के सिवन ने कहा कि चंद्रमा पर लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन का पता लग चुका है. ऑर्बिटर ने लैंडर की कुछ तस्वीरें (थर्मल इमेज) ली हैं. हालांकि, ये तस्वीरें फिलहाल इसरो तक नहीं पहुंची हैं.

‘विक्रम’ से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है. इस बीच कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर संपर्क बहाल नहीं हो पाया, तो उम्मीदें धूमिल भी हो सकती हैं.शनिवार को इसरो ने कहा था कि 14 दिन अहम हैं. इस दौरान इस बात का पता चलेगा कि लैंडर ‘विक्रम’ कहां और कैसे है. दरअसल, चंद्रमा की सतह पर ‘विक्रम’ की ‘हार्ड लैंडिंग’ से संपर्क में बाधा उत्पन्न हो रही है. हार्ड लैंडिंग के कारण विक्रम सहजता से अपने चार पैरों के सहारे नहीं उतरा है. इसरो चीफ ने माना कि लैंडर ‘विक्रम’ ने निश्चित ही हार्ड लैंडिंग की है. Âपेज 13 भी देखें
इसरो प्रमुख बोले- देश के समर्थन व पीएम के संबोधन ने बढ़ाया हौसला
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और देश के समर्थन ने वैज्ञानिकों का मनोबल बढ़ाया है. प्रधानमंत्री का अंदाज अभूतपूर्व था. हम वास्तव में बेहद खुश हैं. मिशन में पूरे मनोबल के साथ जुटे हैं.
के सिवन, इसरो प्रमुख
प्रधानमंत्री मोदी बोले- सौ सेकेंड ने पूरे देश को जगाया और जोड़ दिया
रोहतक में एक सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छह सितंबर की देर रात 1 बजकर 50 मिनट पर पूरा देश टीवी पर नजरें टिकाये बैठा था. देश-दुनिया एक नजर से वहां देख रही थी. एक घटना ने 100 सेकेंड के अंदर पूरे देश को जगा दिया. 100 सेकेंड में देश को जोड़ दिया. अब हिंदुस्तान में इसरो स्पिरिट है.
लैंडर की छोड़ें, ऑर्बिटर है न
चंद्रयान- 2 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान का इसरो से संपर्क टूटने पर भी सबकुछ खत्म नहीं हुआ है. यान से एक सितंबर को अलग हुआ ऑर्बिटर लगातार चंद्रमा के चक्कर लगा रहा है. यह सात साल तक काम करेगा. यदि लैंडर और रोवर की स्थिति पता नहीं भी चलता है, तो मून मिशन-2 पर काम जारी रहेगा.
सवालों के बीच चमत्कार की उम्मीद
लैंडर विक्रम का अभी तक लोकेशन ही पता चला है, लेकिन वह किस हाल में है, उसे नुकसान पहुंचा है या ठीक है, उलटा है या सतह पर सीधा खड़ा है, इस बारे में पुख्ता तौर पर पता नहीं चल पाया है. वैसे लैंडर से संपर्क की कोशिश जारी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हार्ड-लैंडिंग के बाद विक्रम चांद की सतह पर सीधा होगा और उसके उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा होगा, तो उससे संपर्क स्थापित होने में समस्या नहीं होगी.
लैंडर विक्रम के अंदर ही रोवर प्रज्ञान है, जिसे सॉफ्ट-लैंडिंग के बाद चांद की सतह पर उतरना था.
जापान संग बड़े मिशन मून की तैयारी
मिशन मून के बाद इसरो के हौसले बुलंद हैं. अब चांद के बड़े मिशन पर काम करने की योजना बनायी जा रही है. इसके तहत चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से सैंपल लाने पर काम किया जा सकता है.
चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध के इस मिशन को इसरो जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के साथ मिलकर अंजाम देगा. दोनों के वैज्ञानिक चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध करने के लिए एक संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर काम करने की संभावना पर स्टडी कर रहे हैं.
नासा भी कायल : सौर प्रणाली पर इसरो संग शोध करने को इच्छुक
चंद्रयान -2 के बाद नासा भी इसरो का कायल हो गया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारत की कोशिश ने उसे प्रेरित किया है.
वह भारतीय एजेंसी के साथ सौर प्रणाली पर शोध करने को इच्छुक है. दक्षिण व मध्य एशिया के लिए अमेरिका के कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस जी वेल्स ने ट्वीट किया कि इसरो के बेहतरीन प्रयास के लिए उसे बधाई. हम सौर प्रणाली पर मिल कर खोज करने को लेकर उत्साहित हैं.
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