मून मिशन-2 : हार्ड-लैंडिंग में विक्रम को नुकसान होने की आशंका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Sep 2019 5:31 AM (IST)
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बेंगलुरु : चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा खींचे गये थर्मल इमेज से लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन का पता चला है, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका है. वह किस हाल में है, उसे नुकसान पहुंचा है या ठीक है, इस बारे में पुख्ता तौर पर अभी कुछ पता नहीं चल पाया है. अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक, […]
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बेंगलुरु : चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा खींचे गये थर्मल इमेज से लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन का पता चला है, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका है. वह किस हाल में है, उसे नुकसान पहुंचा है या ठीक है, इस बारे में पुख्ता तौर पर अभी कुछ पता नहीं चल पाया है. अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा लगता है कि लैंडर चांद की सतह से तेजी से टकराया है. इस कारण वह पलट गया है.
अब उसकी स्थिति ऊपर की ओर बतायी जा रही है. उन्होंने बताया कि हार्ड-लैंडिंग की आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता है. इससे संभावना है कि लैंडर टूट गया हो. एक अन्य विशेषज्ञ ने बताया कि जिस गति से उसे सॉफ्ट-लैंडिंग करनी थी, उस गति से उसने नहीं किया है. हो सकता है कि वह (लैंडर) अपने चारों पैरों पर न हो. झटकों से लैंडर को नुकसान पहुंचा होगा.
भारत 10 बरसों में चंद्रमा पर बनायेगा अपना बेस
डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक एवं ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले ए शिवतनु पिल्लई ने दावा किया है कि भारत हीलियम-3 प्राप्त करने के लिए 10 साल में चंद्रमा की सतह पर एक बेस स्थापित करने में सक्षम हो जायेगा.
पिल्लई ने कहा कि हीलियम-3 भविष्य की ऊर्जा का नया स्रोत है. हीलियम-3 एक गैर रेडियोसक्रिय पदार्थ है जो यूरेनियम की तुलना में 100 गुना अधिक ऊर्जा पैदा कर सकता है. पिल्लई ने कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रम में, हम उन चार देशों में शामिल हैं जिन्होंने प्रौद्योगिकी को लेकर महारत हासिल की है.
अगले 12 दिन अहम
चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पूरी तरह ठीक है और वह करीब 100 किमी की ऊंचाई पर स्थित अपनी कक्षा में चांद की परिक्रमा कर रहा है. वह साढ़े सात साल तक सक्रिय रहेगा और धरती तक चांद की तस्वीरें और डेटा भेजता रहेगा. ऑर्बिटर अगले दो दिनों में उसी लोकेशन से गुजरेगा, जहां लैंडर से संपर्क टूटा था.
ऐसे में ऑर्बिटर जब उस लोकेशन से गुजरेगा, तो लैंडर की तस्वीरें ले सकता है. ऑर्बिटर द्वारा भेजे गये डेटा के विश्लेषण से किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. अगले 12 दिनों में लैंडर की स्थिति से लेकर उससे जुड़े सारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे.
लैंडर विक्रम पर ही टिका है रोवर प्रज्ञान का भविष्य
लैंडर विक्रम के साथ ही उसमें मौजूद रोवर प्रज्ञान का भविष्य भी अधर में है. तय योजना के मुताबिक, लैंडर की चांद पर सॉफ्ट-लैंडिंग के बाद उसके अंदर से छह पहियों वाला रोवर प्रज्ञान बाहर आता. 14 दिन यानी 1 ल्यूनर डे के अपने जीवनकाल के दौरान रोवर ‘प्रज्ञान’ चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलता. इसका काम चांद की सतह की तस्वीरें और आंकड़े इकट्ठा करना था.
ऑर्बिटर सही से काम कर रहा, लैंडर से संपर्क साधना चुनौती
अंतरिक्ष विशेषज्ञ अजय लेले ने कहा कि चंद्रयान-2 के विक्रम की स्थिति की जानकारी देना साबित करता है कि ऑर्बिटर सही से काम कर रहा है.
यह महज वक्त की बात थी कि ऑर्बिटर विक्रम को कब तक खोज पाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि लैंडर किस स्थिति में है. ऑर्बिटर के सही ढंग से काम करने से मिशन के 90 से 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिये जायेंगे. इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस नांबी नारायणन ने कहा कि अगली चुनौती लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने की है.
इसरो को तलाशना है जवाब
विक्रम चांद की सतह पर लैंड कर पाया है या नहीं
विक्रम ने क्रैश किया या फिर सतह पर उतरने से पहले दिशा भटक गया
अगर क्रैश किया, तो कितना नुकसान हुआ है
क्या विक्रम तक सूर्य की रोशनी पहुंच रही है
क्या सोलर एनर्जी से विक्रम दोबारा काम कर पायेगा
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