नीट पेपर लीक के आरोपी यश यादव को कोर्ट ने 21 जून की परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दी

Edited by Rajneesh Anand
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राउज एवेन्यू कोर्ट

NEET Paper Leak Case : नीट यूजी की परीक्षा 21 जून को दोबारा होने वाली है. इस परीक्षा में शामिल होने के लिए पेपर लीक के आरोपी यश यादव ने कोर्ट से अनुमति मांगी थी.

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NEET Paper Leak Case : नीट पेपर लीक के आरोपी यश यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 21 जून को होने वाले नीट यूजी एग्जाम में बैठने की इजाजत दे दी है. साथ ही यश को इस बात की अनुमति भी मिल गई है कि वे अपनी बहन की शादी में शामिल हो सकते हैं. यश यादव ने कोर्ट से अपने पास किताबें रखने की इजाजत मांगी थी, ताकि वह परीक्षा में शामिल हो सके. कोर्ट ने उसे इस बात की भी अनुमति दे दी थी. यश यादव नीट पेपर लीक के 5 आरोपियों में से एक है.

शिक्षा मौलिक अधिकार

राउज एवेन्यू कोर्ट ने यश यादव को नीट यूजी परीक्षा में शामिल होने की इजाजत देते हुए कहा कि शिक्षा एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है. इसी वजह से कोर्ट ने यश यादव को परीक्षा देने की इजाजत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि यश को पुलिस की कस्टडी में ही परीक्षा स्थल ले जाया जाएगा.

2 जून को मिली थी पढ़ाई की इजाजत

नीट पेपर लीक के पांच आरोपियों में से एक यश यादव ने 2 जून दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नीट यूजी परीक्षा की पढ़ाई के लिए किताबें रखने की इजाजत मांगी थी. उनकी वकील अंबिका यादव ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को बताया था कि वह एक होनहार छात्र है और उसने 3 मई को परीक्षा दी थी. परीक्षा स्थिगित होने के बाद दोबारा 21 जून को आयोजित की जा रही है. यश यादव ने कोर्ट से परीक्षा में शामिल होने की इजाजत मांगी थी, जो उसे 16 जून को मिल गई.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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