मेटा से लगातार दूसरे दिन पूछताछ: एल्गोरिद्म पर सख्ती, सरकार ने दी सेफ हार्बर खत्म करने की चेतावनी

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मेटा के अधिकारी पूछताछ के बाद बाहर निकलते हुए, फोटो ANI

भारत में सोशल मीडिया कंपनी मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. गुरुवार को लगातार दूसरे दिन केंद्र सरकार के अधिकारियों ने मेटा से करीब एक घंटे तक कड़ी पूछताछ की. इस दौरान इंस्टाग्राम के एल्गोरिद्म, फर्जी खबरों (डीपफेक), बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर केंद्र ने कंपनी से जवाब तलब किया.

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सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत में अमेरिकी कानून नहीं चल सकता है. मेटा को भारतीय कानूनों के अनुसार चलना पड़ेगा.

मेटा पर क्यों सख्त हुई सरकार? क्या है पूरा मामला

यह पूरा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक पोस्ट को करीब पांच घंटे तक हटाए जाने के बाद शुरू हुआ. हालांकि, बाद में मेटा ने इसे एआई (AI) फिल्टर की तकनीकी गलती बताते हुए पोस्ट बहाल कर दी थी. सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को हुई पहली बैठक में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ओर से सरकार से इसके लिए औपचारिक माफी मांगी गई. मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल केपलन के नेतृत्व में एक दल ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की है.

'सेफ हार्बर' सुरक्षा छीनने की चेतावनी

बैठक में सरकार ने आईटी कानून की धारा 79 का हवाला देते हुए मेटा को सख्त चेतावनी दी. सरकार ने साफ कहा कि अगर कंपनी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती है और गैर-कानूनी कंटेंट पर रोक नहीं लगाती, तो उसे भारतीय कानून के तहत मिलने वाली कानूनी छूट (Safe Harbour Protection) खत्म की जा सकती है.


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मेटा ने मानी अपनी नाकामी

पूछताछ के दौरान जब सरकार ने अवैध सामग्री को रोकने के उपायों पर सवाल उठाया, तो मेटा ने माना कि उसकी मौजूदा प्रणालियां पूरी तरह सक्षम नहीं हैं और वह सभी अवैध सामग्री को रोक पाने में असमर्थ रही है. हालांकि, मेटा ने आश्वासन दिया है कि वह डीपफेक, फेक खातों और बाल यौन शोषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है.

3-4 दिन और चलेगी जांच

सरकारी सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने बताया, मेटा के अधिकारियों से पूछताछ का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है. अगले 3 से 4 दिनों तक मेटा की तकनीकी टीम सरकार के साथ सरकारी अधिकारी बात करेंगे.


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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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