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एक साथ तीन हस्तियों को देश का सर्वोच्च सम्मान देने का एलान - प्रणब, नानाजी व भूपेन को भारत रत्न

Updated at : 26 Jan 2019 5:07 AM (IST)
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एक साथ तीन हस्तियों को देश का सर्वोच्च सम्मान देने का एलान - प्रणब, नानाजी व भूपेन को भारत रत्न

नयी दिल्ली : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रसिद्ध संगीतकार-गायक भूपेन हजारिका और भारतीय जनसंघ के नेता व समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया जायेगा. देशमुख व हजारिका को मरणोपरांत इस सम्मान के लिए चुना गया है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन हस्तियों […]

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नयी दिल्ली : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रसिद्ध संगीतकार-गायक भूपेन हजारिका और भारतीय जनसंघ के नेता व समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया जायेगा. देशमुख व हजारिका को मरणोपरांत इस सम्मान के लिए चुना गया है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन हस्तियों को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों के योगदान का जिक्र करते हुए इन्हें भारत रत्न दिये जाने पर खुशी जतायी है. उन्होंने प्रणब दा से फोन पर बातचीत भी की. चार साल के अंतराल के बाद भारत रत्न पुरस्कार दिया गया है. 2015 में मोदी सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को इस सम्मान से नवाजा गया था. भारत रत्न, देश का वह सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है.

इन तीन हस्तियों को यह सम्मान दिये जाने के साथ ही अब तक 48 लोगों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है. तीनों ही नाम काफी बड़े हैं. 83 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं. अपने पांच दशक के संसदीय कैरियर में वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. मुखर्जी 1982 में 47 वर्ष की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने थे. 2004 से उन्होंने तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों विदेश मंत्रालय, रक्षा और वित्त मंत्रालय का कामकाज संभाला था. पिछले साल नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल होने पर मुखर्जी को कुछ लोगों से आलोचना का सामना करना पड़ा था.
नानाजी देशमुख ने अपना जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया था. ग्रामीण विकास में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है. 1974 में आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के शिल्पकारों में से उन्हें एक माना जाता था. वह 1928 से लेकर 2010 में अपनी मृत्यु तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे थे. उन्हें पूरे भारत में आरएसएस से प्रेरित स्कूलों की शुरुआत करने के लिए भी जाना जाता है. वह भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे.
1926 में जन्मे मशहूर लोक गायक भूपेन हजारिका असम से ताल्लुक रखते हैं. वह गीतकार के साथ कवि और फिल्म-निर्माता थे. हजारिका ने 1952 में कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी. उनका निधन 2011 में हुआ. उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था. 2004 में भाजपा के टिकट पर गुवाहाटी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था , हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी. वह 1967-72 के दौरान असम में निर्दलीय विधायक भी रहे थे. उन्होंने अपना पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था.
प्रणब मुखर्जी
कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति थे. अपने पांच दशकों के राजनीतिक जीवन में वह कई अहम पदों पर रहे. यूपीए सरकार में वह रक्षा, विदेश और वित्त मंत्री भी थे.
नानाजी देशमुख
चंडिकादास अमृतराव देशमुख को नानाजी देशमुख के नाम से भी जाना जाता है. नानाजी देशमुख भारत के एक सामाजिक कार्यकर्ता थे. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में काम किया.
डॉ भूपेन हजारिका
भूपेन हजारिका, असम के गीतकार, संगीतकार, गायक, कवि और फिल्म-निर्माता थे. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर असम और पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति और लोक संगीत को हिंदी सिनेमा के माध्यम से पेश किया था.
देश के लोगों के प्रति विनम्रता और कृतज्ञता की भावना के साथ मैं इस महान सम्मान को स्वीकार करता हूं. मैं हमेशा कहता हूं और मैं दोहराता हूं कि मैंने जितना दिया है उससे कहीं ज्यादा मुझे मेरे महान देश के लोगों से मिला है. – प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति
20 वर्ष बाद दो से ज्यादा हस्तियों का चयन
1999 में सितार वादक पं रविशंकर, अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन और स्वतंत्रता सेनानी रहे गोपीनाथ बोरदोलोई को इस सम्मान के लिए चुना गया था. इसके बाद 2019 में तीन लोगों का चयन इस सम्मान के लिए किया गया है.
क्या है भारत रत्न सम्मान
1954 में इस सम्मान की शुरुआत की गयी थी. यह राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इनमें कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है. इसकी स्थापना तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गयी थी.
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