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कमलनाथ ने शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद किसानों की कर्ज माफी के आदेश जारी किये

Updated at : 17 Dec 2018 5:54 PM (IST)
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कमलनाथ ने शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद किसानों की कर्ज माफी के आदेश जारी किये

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की सोमवार को शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किये गये वादे के अनुरूप किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने को मंजूरी प्रदान कर दी. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस के घोषणापत्र ‘वचनपत्र’ […]

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भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की सोमवार को शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किये गये वादे के अनुरूप किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने को मंजूरी प्रदान कर दी.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस के घोषणापत्र ‘वचनपत्र’ के लोकहित के कुछ अन्य बिन्दुओं पर भी पहले ही दिन फैसला किया. इसमें विवाह योग्य कन्याओं को सरकार की ओर से 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता देना तथा प्रदेश में निवेश के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन राशि तभी देने का निर्णय शामिल है जब संबंधित निवेशकर्ता 70 प्रतिशत रोजगार प्रदेश के लोगों को देने की शर्त पूरी करे. नये मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चार ‘गारमेंट पार्क’ स्थापित करने की भी घोषणा की. सोमवार दोपहर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शाम को मंत्रालय में कमलनाथ ने पत्रकारों से कहा, शपथ लेने के बाद सबसे पहले किसानों के दो लाख रुपये तक के ऋण माफ करने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किये हैं. कर्ज माफी की फाइल पर कमलनाथ के हस्ताक्षर के बाद प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ राजेश राजोरा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिये.

इस आदेश में कहा गया, मध्यप्रदेश शासन एतद् द्वारा निर्णय लिया जाता है कि राज्य में स्थित राष्ट्रीयकृत तथा सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में शासन द्वारा पात्रता अनुसार पात्र पाये गये किसानों के दो लाख रुपये की सीमा तक का 31 मार्च 2018 की स्थिति में बकाया फसल ऋण माफ किया जाता है. राजोरा के अनुसार सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 34 लाख किसान लाभान्वित होगें तथा प्रदेश पर 35-38 हजार करोड़ का संभावित व्यय पड़ेगा. गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस साल सात जून को मंदसौर जिले की पिपल्या मंडी में एक रैली में घोषणा की थी कि यदि मध्यप्रदेश में उनकी सरकार सत्ता में आयी तो वह 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर देगी.

इसके बाद, कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी को अपने घोषणापत्र ‘वचन पत्र’ में शामिल किया था. इसके बाद प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान लगभग सभी आमसभाओं में गांधी ने कांग्रेस के इस वादे का उल्लेख किया. किसानों के कर्ज माफी के निर्णय पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के फैसले के तुरंत बाद गांधी ने ट्वीट किया, मध्यप्रदेश के सीएम ने कृषि ऋण माफ कर दिया है. एक में हो गया, दो में होना है. कमलनाथ ने कहा, किसानों पर 80 प्रतिशत सरकारी बैंकों का कर्जा है. मैं बैंकों को कहना चाहता हूं कि जब वे बड़े-बड़े उद्योगपतियों का 40-50 प्रतिशत कर्जा माफ कर देते हैं, तब तुम्हारे (बैंकों के) पेट में दर्द नहीं होता है और किसानों का कर्जा माफ करने में दर्द होता है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब हमारी पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने देश के किसानों का कर्जा माफ किया था तो केवल डिफॉल्टर्स का किया था. लेकिन, इस बार हम मध्यप्रदेश में वर्तमान में जिन पर कर्ज चल रहा है, उनका भी कर्जा माफ करेंगे और डिफॉल्टर्स का कर्जा भी माफ करेंगे.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि किसानों की कर्ज माफी के अलावा कांग्रेस के घोषणापत्र के एक अन्य बिंदु पर भी आज फैसला लिया गया. इसके तहत अब प्रदेश में विवाह योग्य कन्या को ‘कन्यादान योजना’ के तहत सरकार की ओर से दी जानेवाली आर्थिक सहायता की राशि बढ़ाकर 51,000 रुपये कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा प्रदेश में चार ‘गारमेंट पार्क’ बनाने का निर्णय भी लिया गया है. इससे केवल गारमेंट पार्क से ही रोजगार नहीं मिलेगा, बल्कि युवाओं को संबंधित रोजगार भी मिलेगा और संबंधित विकास से प्रदेश में आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा निर्णय लिया गया कि प्रदेश में उन्ही उद्योगों को सरकारी प्रोत्साहन (इन्सेंटिव) दिया जायेगा जो अपने उद्योग में 70 प्रतिशत मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार देने की शर्त पूरी करेंगे.

मंत्रिमंडल गठन के एक सवाल पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने इस बारे में अभी कुछ निर्णय नहीं किया है और वह इस बारे में मंगलवार से विचार करेंगे. उन्होंने कहा, मेरा मंत्रिमंडल संतुलित रहेगा. जब उनसे पूछा गया कि कर्ज माफ करने के लिए क्या आप कर लगायेंगे, तो इस पर उन्होंने कहा, संसाधन के नये उपाय ढूंढ़े जायेंगे. भाजपा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने (मध्यप्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने) हमें प्रदेश का खजाना खाली करके दिया है. यह बात सबके सामने आ गयी है. कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल इस बिंदु के बारे में पूछे जाने पर कि कांग्रेस सरकार बनने पर सरकारी परिसरों में आरएसएस की शाखाएं लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया जायेगा, उन्होंने कहा, हमने वही कहा जो कि गुजरात और केंद्र सरकार का निर्णय और नियम है.

हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मध्यप्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 114 जीतकर 15 साल बाद राज्य में सत्ता में आयी है. हालांकि, कांग्रेस बहुमत की संख्या 116 से दो सीटें दूर रही, लेकिन कांग्रेस को बसपा के दो, सपा के एक और चार निर्दलीय विधायकों सहित कुल 121 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार दोपहर को यहां जंबूरी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में अकेले शपथ ग्रहण किया. कमलनाथ अपने मंत्रिमंडल का गठन बाद में करेंगे. 72 वर्षीय कमलनाथ को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शपथ दिलायी.

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