जस्टिस जोसेफ के विदाई कार्यक्रम में बोले CJI - उच्च न्यायपालिका अपनी आभा और महिमा खो रहा

नयी दिल्ली : भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने युवा वकीलों के न्यायाधीश बनने की अनिच्छा को लेकर बृहस्पतिवार को आशंका जाहिर की और कहा कि इसके पीछे एक कारण यह है कि उच्च न्यायपालिका अपनी आभा और महिमा खो रही है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ जैसे अच्छे न्यायाधीश […]
नयी दिल्ली : भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने युवा वकीलों के न्यायाधीश बनने की अनिच्छा को लेकर बृहस्पतिवार को आशंका जाहिर की और कहा कि इसके पीछे एक कारण यह है कि उच्च न्यायपालिका अपनी आभा और महिमा खो रही है.
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ जैसे अच्छे न्यायाधीश जा रहे हैं और उनके विकल्प की जरूरत है जिसके लिए उच्चतम न्यायालय का कॉलेजियम बेहतर लोगों की तलाश में दिन प्रतिदिन काम कर रहा है. न्यायमूर्ति जोसेफ बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने कहा, अच्छे न्यायाधीश जा रहे हैं. हमें विकल्पों की जरूरत हैं और इसे मैं बार के साथ साझा करना चाहता हूं. मुझे डर है. मुझे आशंका है. बार के युवा वकील न्यायाधीश बनने के इच्छुक नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा न्यायमूर्ति कुरियन के लिए आयोजित विदाई कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, इसका एक कारण यह भी है कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीश का कार्यालय अपनी आभा और महिमा को खो रहा है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायपालिका की आभा और महिमा थीं जिसने बार की प्रतिभा को आकर्षित किया क्योंकि वकील कड़ी मेहनत करने और पैसों के मामले में बलिदान के इच्छुक होते थे. न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि न्यायाधीशों की प्रतिबद्धता और उनकी कड़ी मेहनत की प्रशंसा और समझ से बार उनकी आभा को दोबारा बहाल कर सकती है.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति कुरियन ने भी युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा, न्यायमूर्ति (दिवंगत) वीएस मालिमाथ ने एक बार मुझसे कहा था जिसे मैं हमेशा याद रखता हूं कि जब युवा अदालत के समक्ष बहस करते हैं और अच्छा काम कर रहे हों, तो हमें उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए और उनकी तारीफ करनी चाहिए. यह उन्हें प्रोत्साहित करेगा, प्रेरणा देगा और उनके जीवन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा. इसके अलावा जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के न्यायिक समय पर पड़नेवाले प्रभाव के बारे में न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा, मुझे लगता है कि बड़ी संख्या में मामलों को जनहित में अनावश्यक रूप से उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कानून बनानेवाले लोग भी जनता के हितों से अवगत हैं क्योंकि वे सार्वजनिक नैतिकता के प्रति भी जागरूक हैं.
उन्होंने कहा कि संविधान के कारण भारत संस्कृति, धर्म और दर्शनशास्त्र की विविधता के बावजूद एक है और जो लोग संविधान की व्याख्या में लगे हैं, उन्हें देश की विविधता को ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने कहा, कानूनविदों की चुप्पी आम आदमी की हिंसा से अधिक नुकसान पहुंचा सकती है. न्यायपालिका के क्षेत्र में बिताये अपने कई वर्षों के बारे में बात करते हुए न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा, मेरी अंतरात्मा साफ है. मैं अपना सिर ऊंचा रख सकता हूं. मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ काम किया है. हो सकता है मैं निपुण नहीं हूं, कोई भी निपुण नहीं हो सकता.
अटाॅर्नी जनरल (एजी) केके वेणुगोपाल और एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने न्यायमूर्ति कुरियन की प्रशंसा की. वेणुगोपाल ने कहा कि न्यायमूर्ति कुरियन सर्वोच्च न्यायालय में सबसे अच्छे और सबसे खुशमिजाज न्यायाधीशों में से एक हैं. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत की पीठों द्वारा दिये गये 1040 फैसलों में न्यायमूर्ति कुरियन सदस्य थे और उन्होंने 843 फैसले खुद लिखे. सिंह ने अपने भाषण में केरल में बाढ़ राहत के लिए न्यायमूर्ति कुरियन द्वारा किये गये प्रयासों, बार के साथ उनके मधुर संबंधों और उनके धैर्य का भी जिक्र किया.
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