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बुदनी में पीएम मोदी पर भारी पड़ रहे हैं मुख्यमंत्री शिवराज, विरोधी भी स्वीकारते हैं उनकी लोकप्रियता की बात

Updated at : 24 Nov 2018 1:41 AM (IST)
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बुदनी में पीएम मोदी पर भारी पड़ रहे हैं मुख्यमंत्री शिवराज, विरोधी भी स्वीकारते हैं उनकी लोकप्रियता की बात

बुदनी, विदिशा से मिथिलेश ‘साहेब, शिवराज सिंह चौहान अच्छे नेता हैं. मैं भाजपा की बात नहीं कह रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण शिवराज थोड़े कमजोर पड़े हैं. केंद्र का फैसला ठीक नहीं होता’. बुदनी रेलवे स्टेशन के सामने खड़े युवक हसन अली के ये बोल शिवराज सिंह की लोकप्रियता बयां करते हैं. बुदनी समेत […]

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बुदनी, विदिशा से मिथिलेश
‘साहेब, शिवराज सिंह चौहान अच्छे नेता हैं. मैं भाजपा की बात नहीं कह रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण शिवराज थोड़े कमजोर पड़े हैं. केंद्र का फैसला ठीक नहीं होता’. बुदनी रेलवे स्टेशन के सामने खड़े युवक हसन अली के ये बोल शिवराज सिंह की लोकप्रियता बयां करते हैं.
बुदनी समेत पूरे प्रदेश में ‘मामा जी’ के उपनाम से प्रसिद्ध शिवराज सिंह की तीसरी बार विधानसभा पहुंचने की राह कठिन नहीं दिखती. उनके धूर विरोधी भी यह कहते मिल जाते हैं की शिवराज ने अच्छा काम किया है. भोपाल से लेकर बुदनी तक भाजपा के जितने भी पोस्टर टंगे हैं, उनमें पहले शिवराज की तस्वीर ही दिखती है.
शिवराज सिंह नामांकन का परचा दाखिल करने के बाद दोबारा बुदनी नहीं आये. कांग्रेस ने शिवराज के मुकाबले पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को चुनाव मैदान में उतरा है. बुदनी विधानसभा क्षेत्र विदिशा लोकसभा सीट का अंग है. विदिशा का प्रतिनिधित्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके हैं. खुद शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के पहले विदिशा से सांसद रहे हैं. मौजूदा समय में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यहां से सांसद हैं.
हाइ प्रोफाइल विदिशा सीट का पार्ट रहे बुदनी की सड़कें अब भी धूलभरी हैं. होशंगाबाद की ओर से बुदनी जाने वाली सड़क उबड़-खाबड़ है. इसके वावजूद शिवराज की लोकप्रियता यहां कम होती नहीं दिखती. हालांकि , मुख्यमंत्री के चुनावी क्षेत्र में उनके खिलाफ बोलने वाले लोग भी मिल जाते हैं.
गांव वाले कहते हैं- वोट तो शिवराज को ही देंगे
एनएच 69 से साढ़े तीन किलोमीटर दूर है शिवराज सिंह चौहान का गांव जैत.नामांकन के दिन यहां आये शिवराज ने गांव वालों से कहा था कि वोट मांगने नहीं आऊंगा, आपका चुनाव है. यहां उनके छोटे भाई का परिवार रहता है. गांव के बाहर 60 वर्षीय बाबू लाल मिलते हैं. दैनिक मजदूरी कर रोजी कमाने वाले बाबू लाल कहते हैं, वोट तो शिवराज को ही देंगे. रास्ते में कहार जाति से आने वाले मनन मिलते है.
सात बच्चों के पिता मनन के पास राशन कार्ड तक नहीं है. वोट किसे देंगे , इस पर मनन मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘नेता तो एक ही है शिवराज’. नागपुर जाने वाली सड़क किनारे एक ढाबे पर खाना खाने आये युवकों की टोली शिवराज के गुण गाते नहीं थकती. इनमें से एक संदीप यादव ने कहा कि भैया सरकार तो भाजपा की बनती दिख रही है. बुदनी विधायक नहीं चुनता, हम तो मुख्यमंत्री बनाते हैं.
रास्ते में हमारी मुलाकात होती है बिहार के मधुबनी जिले के नवहथ गांव निवासी और रेलवे के अधिकारी सुमन कुमार से. सुमन कुमार कहते हैं-सरकार भाजपा की ही बनेगी. कांग्रेस की ओर मन भी होता है, तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार याद आ जाती है.
उस समय बिजली तो दूर, सड़क भी ऐसी थी जिस पर पांच किलोमीटर तक नहीं चला जा सकता था. अब फिजा बदल चुकी है. 18 साल से भोपाल में रह रहे बैंक अधिकारी सुदीप्त नायक कहते हैं- ‘कांग्रेस सरकार के दिनों याद आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. शाहगंज मुख्य बाजार के दोनों ओर कांग्रेस और भाजपा के झंडे लहरा रहे हैं.
यहां अपनी कार लेकर खड़े सुधाकर मिलते हैं. सुधाकर बदलाव की बात करते हैं. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ी है, किसान फटेहाल हो रहे हैं, हम दिन भर की मेहनत के बाद भी अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर पाते. सुधाकर को उम्मीद है कि इस बार कांग्रेस की सरकार बन जायेगी.
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