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INX Media मामला : कार्ति को अदालतों से नहीं मिली राहत, 3 दिन की सीबीआई कस्‍टडी

Updated at : 06 Mar 2018 4:01 PM (IST)
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INX Media मामला : कार्ति को अदालतों से नहीं मिली राहत, 3 दिन की सीबीआई कस्‍टडी

नयी दिल्ली : कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को मंगलवार को आईएनएक्स मीडिया घूस मामले में एक निचली अदालत ने तीन और दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया और इसी से जुड़े एक धन शोधन मामले में वह उच्चतम न्यायालय से प्रवर्तन निदेशालय के हाथों गिरफ्तारी से संरक्षण पाने में भी […]

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नयी दिल्ली : कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को मंगलवार को आईएनएक्स मीडिया घूस मामले में एक निचली अदालत ने तीन और दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया और इसी से जुड़े एक धन शोधन मामले में वह उच्चतम न्यायालय से प्रवर्तन निदेशालय के हाथों गिरफ्तारी से संरक्षण पाने में भी नाकाम रहे. कार्ति ने इस बीच यह आरोप लगाकर निचली अदालत से जमानत मांगी कि सीबीआई उनके पिता की इज्जत को बट्टा लगाने के लिए केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है.

दरअसल आईएनएक्स मीडिया समूह को उनके पिता के मंत्री पद पर रहने के दौरान ही एफआईपीबी मंजूरी दी गयी थी. कार्ति चिदबंरम की पांच दिन की सीबीआई हिरासत की अवधि पूरी होने पर जांच एजेंसी ने आज उन्हें विशेष न्यायाधीश सुनील राणा के समक्ष पेश किया. जांच एजेंसी ने कहा कि ‘नये तथ्यों के सामने आने’ की वजह से उसकी हिरासत की अवधि बढ़ाये जाने की आवश्यकता है.

जांच एजेंसी ने कहा कि इन नये तथ्यों के साथ उससे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है. जांच एजेंसी ने कहा कि यद्यपि इस मामले की जांच में पिछले चार दिन में ‘काफी प्रगति’ हुई है, परंतु वह सहयोग नहीं कर रहे हैं और उन्होंने अपने फोन के पासवर्ड की जानकारी अभी तक नहीं दी है. जांच एजेंसी ने कहा कि हर सवाल का उनका यही जवाब है, ‘मैं राजनीतिक विद्वेष का शिकार हूं.’

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले के गवाहों से संपर्क किया जा रहा है और साक्ष्य नष्ट किये जा रहे हैं. सीबीआई ने कार्ति चिदबंरम की पुलिस हिरासत की अवधि नौ दिन के लिये बढ़ाने का अनुरोध करते हुये कहा था कि उन्हें मुंबई ले जाया गया था जहां आईएनएक्स मीडिया की एक प्रमोटर इन्द्राणी मुखर्जी के साथ भायखला जेल में उनका आमना सामना कराया गया था और इन्द्राणी का बयान तमाम साक्ष्यों में से एक है.

जांच एजेंसी की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा, ‘इस मामले में दो दिन पहले ही नयी जानकारियां सामने आयी हैं. जांच के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती लेकिन हमें नये तथ्यों के आलोक में उससे हिरासत में पूछताछ करने की आवश्यकता है.’ उन्होंने कार्ति चिदबंरम की जमानत की अर्जी का विरोध करते हुये कहा कि जांच अभी ‘महत्वपूर्ण चरण’ में है और जांच एजेंसी को उनकी जमानत अर्जी पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिये दो सप्ताह चाहिए.

हालांकि अदालत ने कार्ति की जमानत अर्जी की सुनवाई नौ मार्च के लिये सूचीबद्ध कर दी जब उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने पर पेश किया जायेगा. हिरासत के दौरान अदालत के एक मार्च के आदेश में लगायी गयी सारी शर्तो का पालन करना होगा. इसके अंतर्गत कार्ति चिदबंरम की हर 24 घंटे बाद मेडिकल जांच होगी ओर उन्हें सुबह और शाम रोजाना एक एक घंटे अपने वकील से बात करने की छूट होगी.

यद्यपि उन्हें अपने साथ मेडिकल पर्चे पर लिखी दवायें ले जाने की अनुमति होगी लेकिन घर का खाना नहीं मिलेगा. कार्ति चिदबंरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जांच एजेंसी किसी न किसी तरह उन्हें हिरासत में रखना चाहती है. सिंघवी ने कहा, ‘मैने सहयोग किया है. आप जो सुनना चाहते हैं उसे कहने के लिये मैं बाध्य नहीं हूं. मेरा काम पूछताछ के लिये खुद को उपलब्ध कराना है.’

उन्होंने सवाल किया कि क्या इन्द्राणी का बयान एक स्वीकार्य साक्ष्य है? वह अपनी बेटी की हत्या के आरोप में जेल में है. उन्होंने कहा कि कार्ति चिदबंरम कोई आतंकवादी नहीं है जिससे हिरासत के बगैर पूछताछ नहीं की जा सकती. अदालत में कार्यवाही के दौरान कार्ति के पिता पी. चिदबंरम और मां नलिनी चिदबंरम भी मौजूद थे. अदालत ने उन्हें अपने माता पिता से दस मिनट मुलाकात करने की अनुमति भी दी.

इस बीच उच्चतम न्यायालय ने कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया ग्रुप से जुड़े कथित मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किये जाने से अंतरिम संरक्षण देने से आज इनकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने निदेशालय व सीबीआई से कहा है कि वह मनी लांड्रिंग मामले में जांच के खिलाफ कार्ति की नयी याचिका पर अपने जवाब दाखिल करें.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा व न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि उसका आदेश किसी अदालत में चल रही कार्रवाई में आड़े नहीं आयेगा. न्यायालय ने कहा, यह कहने की जरूरत नहीं है कि हमारे मौजूदा आदेश का याचिककर्ता के खिलाफ किसी अदालत में लंबित प्रक्रिया पर कोई असर नहीं होगा. इसके साथ ही न्यायालय ने मामले में आठ मार्च को सुनवाई तय की है.

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति द्वारा दाखिल रिट याचिका के सुनवायी योग्य होने पर सवाल उठाया और कहा कि इसे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल नहीं किया जा सकता. कार्ति की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाये बिना ही किसी व्यक्ति की स्वाधीनता छीनने या सीमित करने के कदम उठाये जाते हैं तो इसे रिट याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है क्यों की यह मूल अधिकार है.

पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि वह रिट याचिका को सुनवाई लायक मान लेती है तो उस स्थित में वह उसी पहलू गौर करेगी जो संवैधानिक अधिकारों से संबंधित है. सिब्बल ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके मुवक्किल को लगातार परेशान कर रही हैं और आईएनएक्स मीडिया मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट ईसीआईआर की प्रति आज तक उसे नहीं दी गयी है. ईसीआईआर एक तरह की एफआईआर ही होती है. सिब्बल के साथ-साथ वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद व विवेक तन्खा भी कार्ति की ओर से न्यायालय में हाजिर हुए.

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