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उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री के प्रतिबंध के आदेश में किये बदलाव

Updated at : 12 Sep 2017 2:52 PM (IST)
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उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री के प्रतिबंध के आदेश में किये बदलाव

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री के लिये स्थाई और खुदरा लाइसेंस निलंबित करने के अपने पिछले साल नवंबर के आदेश में आज कुछ समय के लिये संशोधन किया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि दीवाली पर्व के बाद स्थाई लाइसेंस निलंबित करने के आदेश को हटाने के […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री के लिये स्थाई और खुदरा लाइसेंस निलंबित करने के अपने पिछले साल नवंबर के आदेश में आज कुछ समय के लिये संशोधन किया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि दीवाली पर्व के बाद स्थाई लाइसेंस निलंबित करने के आदेश को हटाने के बारे में समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है लेकिन यह इस त्यौहार के बाद वायु की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की दो सदस्यीय पीठ ने केंद्र और संबंधित प्राधिकारियों से कहा कि वे लोगों को अलग अलग पटाखे चलाने की बजाये सामूहिक रुप से इसमें शामिल होने के लिये प्रोत्साहित करने पर विचार करें. शीर्षअदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है जो दशहरा और दीवाली पर्व के दौरान चलाये गये पटाखों का लोगों के स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगी. न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि इस बार अस्थाई लाइसेंसों की संख्या पिछले साल की तुलना में आधी की जाये। न्यायालय ने इसकी अधिकतम सीमा 500 निर्धारित की है.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, स्थाई लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश संबंधी 11 नवंबर, 2016 का आदेश कुछ समय के लिये हटाया जा रहा है. दीवाली के बाद इसकी समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है लेकिन यह इस पर्व के बाद वायु की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। हालाकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि स्थाई लाइसेंसधारकों पटाखों की बिक्री दिये गये निर्देशों के अनपुरुप ही होनी चाहिए और यह विस्फोटक नियमों के अनुपालन के मुताबिक होने चाहिए। पीठ ने कहा, वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव, स्वच्छ हवा में सांस लेने के मानव अधिकार और स्वास्थ के मानव अधिकार को ध्यान में रखते हुये केंद्र सरकार और दूसरे प्राधिकारियों को लोगों को अलग अलग पटाखे चलाने की बजाये उन्हें सामूहिक रुप से पटाखे चलाने के लिये प्रोत्साहित करने पर विचार करना चाहिए.

शीर्षअदालत ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति को अपनी अध्ययन रिपोर्ट 31 दिसंबर तक न्यायालय में दाखिल करनी होगी. न्यायालय ने कहा, दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि वह 2016 की तुलना में इस बार पटाखों की बिक्री के लिये अस्थाई लाइसेंसों की संख्या में 50 प्रतिशत कटौती करे. अस्थाई लाइसेंस 500 से अधिक नहीं होने चाहिए. न्यायालय ने कहा, इसी तरह, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में राज्यों को भी निर्देश दिया जाता है कि वे भी 2016 में दिये गये अस्थाई लाइसेंसों की तुलना में इस बार 50 प्रतिशत से अधिक अस्ठाई लाइसेंस नहीं दें. अस्थाई लाइसेंस वितरित करने के इलाके के बारे में प्राधिकारी ही निर्णय लेंगे. न्यायालय ने कहा कि चूंकि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्याप्त पटाखे उपलब्ध हैं, इसलिए बाहर से पटाखों को लाने पर प्रतिबंध लगाया जाता है और संबंधित प्रवर्तन एजेन्सियां यह सुनिश्चित करेंगी कि अगले आदेश तक दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में और पटाखों का प्रवेश नहीं हो.

न्यायालय ने कहा, हमारी राय में 50 लाख किलोग्राम पटाखे 2017 में दशहरा और दीवाली के लिये पर्याप्त होंगे. पीठ ने पुलिस और जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शांत क्षेत्रों में पटाखे नहीं चलाये जायें. यह क्षेत्र अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवा केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों, अदालतों और धार्मिक स्थलों तथा ऐसे ही दूसरे इलाके से कम से कम एक सौ मीटर पर होता है. न्यायालय ने पटाखा निर्माताओं की याचिका पर यह आदेश दिया जिन्होंने पिछले साल 11 नवंबर के शीर्ष अदालत के आदेश में ढील देने का अनुरोध किया था.

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