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‘ट्रिपल तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, महिलाओं की एकजुटता की जीत

Updated at : 22 Aug 2017 12:40 PM (IST)
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‘ट्रिपल तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, महिलाओं की एकजुटता की जीत

सुप्रीम कोर्ट ने आज ‘ट्रिपल तलाक’ पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया और इसे 3-2 से असंवैधानिक करार देते हुए छह महीने के लिए इसपर रोक लगा दी है. यह ऐतिहासिक फैसला पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सुनाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस मसले पर नया कानून बनाये, तब तक […]

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सुप्रीम कोर्ट ने आज ‘ट्रिपल तलाक’ पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया और इसे 3-2 से असंवैधानिक करार देते हुए छह महीने के लिए इसपर रोक लगा दी है. यह ऐतिहासिक फैसला पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सुनाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस मसले पर नया कानून बनाये, तब तक छह माह की अवधि तक ‘ट्रिपल तलाक’ पर रोक रहेगी. जस्टिस नरीमन, कुरियन और ललित ने ‘ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया है जबकि चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस नजीर ने इसे संवैधानिक बताया है और कहा कि यह प्रथा एक हजार साल से भी अधिक से समय कायम है. कोर्ट के फैसले के बाद ‘ट्रिपल तलाक’ के खिलाफ जंग लड़ रही महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ गयी है और उन्होंने कहा कि ‘ट्रिपल तलाक’ अब इस देश में इतिहास हो गया है.

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क्या है ट्रिपल तलाक
इस्लाम में तलाक के लिए ‘ट्रिपल तलाक’ की व्यवस्था है, जिसके तहत विवाह का इकरारनामा समाप्त हो जाता है. मुस्लिम समाज में ‘निकाहनामा’ शौहर और बीवी के बीच एक एग्रीमेंट है. ट्रिपल तलाक पर आपत्ति इसलिए जतायी जाती है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि मुस्लिम समाज में इस प्रथा का अत्यधिक दुरुपयोग होता है. विगत कुछ वर्षों से फोन, व्हाट्‌सएप और लेटर द्वारा भी महिलाओं को तलाक दिया जाने लगा. ‘ट्रिपल तलाक’ का मुद्दा देश में सर्वाधिक तब गरमाया था जब शाहबानो को तलाक दिया गया था और उन्होंने रखरखाव के लिए कोर्ट की शरण ली थी. कोर्ट ने शाहबानो के पक्ष में फैसला दिया था और उसके पति को निर्देश दिया गया था कि वह शाहबानो को गुजारा भत्ता दे, लेकिन केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने कोर्ट के फैसले को पलटते हुए नया कानून बना दिया था.

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‘ट्रिपल तलाक’ के खिलाफ एकजुट हुईं महिलाएं
ट्रिपल तलाक के खिलाफ कोर्ट पहुंचने वाली शायरा बानो को उसके पति ने 15 साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद वर्ष 2015 में तलाक दे दिया था. शायरा का कहना था कि यह तलाक बिलकुल गलत है और इससे महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है. उसके पति ने उसका बहुत शारीरिक और मानसिक शोषण भी किया था. कोर्ट के फैसले के बाद शायरा बानो ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि मुस्लिम समाज में औरतों की स्थिति को समझा जाये और जल्दी ही एक कानून भी बने. अॅाल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने भी फैसले का स्वागत किया है. शाइस्ता लगातार ट्रिपल तलाक के खिलाफ जंग लड़ रहीं थीं. ट्रिपल तलाक के खिलाफ महिलाओं ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था जिसमें हजारों महिलाओं ने शिरकत की थी. इस मसले पर मुस्लिम महिलाओं को हिंदू महिलाओं का भी साथ मिला और वे धर्म की दीवार छोड़ एक हो गयीं. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लिंग आधारित भेदभाव मिटेगा और महिलाओं को न्याय मिलेगा.

यूपी इलेक्शन के समय नरेंद्र मोदी ने उठाया ट्रिपल तलाक का मुद्दा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रिपल तलाक का मुद्दा उठाया था और कहा था कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रथा महिलाओं के खिलाफ है. यह मानवाधिकार का उल्लघंन है. कहा तो यह भी गया कि विधानसभा चुनाव में उन्हें इसी वजह से मुस्लिम महिलाओं का समर्थन मिला.

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मुस्लिम देशों में बैन है ‘ट्रिपल तलाक’
भारत तो एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन विश्व के 22 मुस्लिम देशों में ‘ट्रिपल तलाक’ पर बैन है. जिसमें पाकिस्तान, सीरिया, ईराक, ईरान, ट्‌यूनेशिया, साइप्रस और जार्डन जैसे देश शामिल हैं.
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