डोकलाम पर रिश्तों में तल्खी के बीच चीन जायेंगे अजित डोभाल, ब्रिक्स सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jul 2017 4:25 PM

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नयी दिल्ली : डोकलाम मुद्दे को लेकर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन जायेंगे. अजीत डोभाल ब्रिक्स देशों की बैठक में हिस्सा लेने बीजिंग जायेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि चीन के साथ हमारे राजनायिक रास्ते […]

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नयी दिल्ली : डोकलाम मुद्दे को लेकर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन जायेंगे. अजीत डोभाल ब्रिक्स देशों की बैठक में हिस्सा लेने बीजिंग जायेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि चीन के साथ हमारे राजनायिक रास्ते खुले हुए हैं. भूटान के साथ कंसल्टेशन हमारी परंपरा रही है. इस मसले को लेकर चीन से किसी भी हाल में डरने की कोई जरूरत नहीं है.

क्या है डोकलाम विवाद
डोकलाम दरअसल दोनों देशों के सीमा विवाद से जुड़ा इलाका है. भूटान में इसे डोलम कहते हैं. 300 किलोमीटर का यह इलाका चीन की चुंबी वैली से सटा हुआ है और सिक्किम के नाथुला दर्रे के करीब है. कई लोग इसके विचित्र भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खंजर का इलाका मानते हैं. यह इलाका चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की तरफ जाता है. चीन का आखिरी शहर याटूंग से सटा है. चीन विवादित इलाके डोलम में सड़क बनाना चाहता है, इसे ही विवाद का जड़ माना गया है.
इसी सड़क का पहले भूटान ने विरोध जताया और फिर भारतीय सेना ने. भारतीय सैनिकों की इस इलाके में मौजूदगी से चीन हड़बड़ा गया है. चीन को ये बर्दाश्त नहीं हो रहा कि जब विवाद चीन और भूटान के बीच है तो उसमें भारत सीधे तौर से दखलअंदाजी क्यों कर रहा है. जबकि भारत-भूटान के बीच इसको लेकर मैत्री संधि है.
राज्यसभा में उठ चुका है भारत और चीन के बीच तनाव का मुद्दा
कल समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दावा किया कि यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और भारत पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस विषय पर उनकी बात नहीं सुन रही और उठाये जानेवाले कदमों पर राय नहीं ले रही.
चीनी सेना के आधिकारिक मुखपत्र पीएलए डेली में कहा गया कि अशांत शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्र में निगरानी रखने और भारत के साथ सीमा के मुद्दों को संभालनेवाली पश्चिमी थियेटर कमान द्वारा क्षेत्र के दक्षिण में उत्तरी तिब्बत के कुनलुन पहाड़ियों पर इस बड़े जखीरे को पहुंचाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि यह कदम पिछले महीने उठाया गया और समूचे क्षेत्र से रेल और सड़क मार्ग से इन साजोसामान को पहुंचाया गया.
चीन के सरकारी मीडिया ने हाल के हफ्तों में भारत के खिलाफ अपनी बातों के जाल में तेजी लायी है, लेकिन यहां कोई तरीका नहीं जिससे ऐसे दावों की सच्चाई की पुष्टि हो सके. इस हफ्ते के शुरू में सरकारी सीसीटीवी ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों के तिब्बत के पठार में भारी सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने और गोला बारूद के इस्तेमाल का प्रसारण किया था.
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