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200 वर्षों से भक्तों का कल्याण कर रही हैं गोला वाली मां दुर्गा

Updated at : 25 Sep 2025 9:39 PM (IST)
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200 वर्षों से भक्तों का कल्याण कर रही हैं गोला वाली मां दुर्गा

गोला वाली मां दुर्गा की महिमा अपरमपार है. जो भी भक्त इनके दरबार में अपना दुखड़ा लेकर आता है, उसकी मुरादें मां अवश्य पूर्ण करती है.

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जयकुमार शुक्ला,

चकाई

गोला वाली मां दुर्गा की महिमा अपरमपार है. जो भी भक्त इनके दरबार में अपना दुखड़ा लेकर आता है, उसकी मुरादें मां अवश्य पूर्ण करती है. कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटता. इस कारण मां के मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है.

200 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

गोला दुर्गा मंदिर पूजा समिति के संयोजक लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि लगभग दो सौ साल पूर्व सन 1821 ईस्वी में अंग्रेजी शासन काल के दौरान गुजरात से आये कुछ व्यवसायियों ने यहां डेरा डालकर किराना दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया था. वहीं एक दिन एक व्यवसायी को मां दुर्गा ने स्वप्न आकर में कहा कि तुम लोग यहां मेरा मंदिर बना कर तथा मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना करो सबका कल्याण होगा. वहीं व्यवसायियों ने स्वप्न की बात बताकर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मां दुर्गा के मंदिर का निर्माण कराया तथा शारदीय नवरात्र के मौके पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना प्रारंभ की तभी से उस मंदिर का नाम गोला दुर्गा मंदिर पड़ा. कालांतर में मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर में पूजा अर्चना करने का जिम्मा खास चकाई निवासी तथा बोसी महराजा के दीवान विष्णु प्रसाद ने अपने हाथ में लिया. उन्होंने कच्चे मंदिर को पक्का मंदिर बनाने का काम किया. वहीं लगभग पचास साल बाद दीवान ने मंदिर में पूजा अर्चना एवं रख रखाव कराने का जिम्मा चकाई के तत्कालीन राजा टिकेट चंडी प्रसाद सिंह को सौंप दिया. वहीं बाद में वर्ष 1987 में स्थानीय लोगों ने गोला दुर्गा पूजा कमेटी का गठन कर गोला मंदिर जीर्णोद्धार, पूजा अर्चना आदि का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया. तबसे कमेटी द्वारा ही पूजा अर्चना कराया जा रहा है. इस दौरान भव्य मंदिर का भी निर्माण कमेटी द्वारा आम लोगों के सहयोग से कराया गया.

गोला वाली मां दुर्गा की होती है तामसी पूजा अर्चना

हर वर्ष शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां गोला वाली दुर्गा की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है. इस मंदिर में होने वाली सरकारी पूजा के तहत सप्तमी, अष्टमी व नवमी को तीन बकरे एवं एक भेड़ा की बलि चढ़ायी जाती है. इसके उपरांत निशा बलि एवं छेद यानि नवमी को श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी संख्या में मनोकामना पूर्ण होने की ख़ुशी में बकरे की बलि चढ़ाई जाती है.

चार दिनों तक मंदिर प्रांगण में लगता है भव्य मेला

चकाई का सबसे प्राचीन मंदिर गोला दुर्गा मंदिर के प्रांगण में शारदीय नवरात्र के मौके पर दशहरा में सप्तमी, महाअष्टमी, नवमी एवं विजयादशमी को चार दिनों तक भव्य मेला का आयोजन होता है. जिसमें दूर दराज से आकर हजारों लोग मां दुर्गा का दर्शन एवं पूजा अर्चना करते हैं. मेला में आये भक्तों के मनोरंजन के लिए कमेटी की और से तारामाची, कठपुतली का नाच, नाव, झूला, कठघोड़वा आदि का आयोजन होता है. मंदिर के पुजारी पंडित चन्द्रधर मिश्र बताते हैं कि आज भी मां गोला वाली दुर्गा की महिमा सुनकर बिहार, झारखंड, बंगाल आदि राज्यों के कोने कोने से भक्त मन्नत मांगने आते हैं तथा गोला दुर्गा मंदिर में धरना देते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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