राष्ट्रीय पोषण दिवस पर प्रभात पड़ताल: कटिहार जिले में हर दूसरा बच्चा अंडरवेट

Updated at : 31 Aug 2025 7:01 PM (IST)
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राष्ट्रीय पोषण दिवस पर प्रभात पड़ताल: कटिहार जिले में हर दूसरा बच्चा अंडरवेट

राष्ट्रीय पोषण दिवस पर प्रभात पड़ताल: कटिहार जिले में हर दूसरा बच्चा अंडरवेट

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– कुपोषण के मामले में कटिहार की स्थिति है काफी गंभीर कटिहार केंद्र व राज्य सरकार के निर्देश पर सोमवार से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की जायेगी. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2018 से सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाने का फैसला लिया है. मुख्य रूप से समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) व स्वास्थ्य महकमा की ओर से लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से कई तरह की गतिविधियां होती रही है. इस बार कटिहार जिले में राष्ट्रीय पोषण माह को लेकर विभिन्न तरह की गतिविधियों के आयोजन की संभावना है. पोषण माह की गतिविधियों व उसकी तैयारी को लेकर जिला प्रशासन की ओर से किसी तरह की औपचारिक जानकारी नहीं दी गयी है. हालांकि यह जरूर कहा जा रहा है कि आईसीडीएस निदेशालय के दिशा निर्देश के आलोक में पोषण माह के दौरान अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जायेगी. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. दूसरी तरफ यह बात भी जग जाहिर है कि बच्चों के समग्र विकास का केंद्र सरकारी स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र को ही माना गया है. यानी महिलाएं जब गर्भवती होती है. उसके बाद से बच्चे के जन्म लेने तथा छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल के लिए आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी टूल के रूप में काम करती है. सरकारी टूल के रूप में प्रसिद्ध आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति भी सर्वविदित है. अगर सिर्फ कटिहार जिले की बात करें तो इस जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र झोपड़ी में संचालित होती है. सरकार के आंकड़ों पर भरोसा करें तो जिले में कुल 3410 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत है. इसमें 3355 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है. संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में से 1110 को अपना भवन है. यानी 2245 आंगनबाड़ी केंद्र भवनहीन है. झोपड़ी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र के जरिये ही कुपोषण से जंग लड़ने का दावा किया जा रहा है. जबकि पोषण के मामले में कटिहार की स्थिति अत्यंत खराब है. नवजात शिशु, बच्चे, किशोरी व महिलाओं में न केवल पोषण के प्रति समझ कम है. बल्कि कुपोषण के शिकार भी है. अगर सरकार की एक रिपोर्ट पर भरोसा करें तो कुपोषण के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये है. यानी कुपोषित महिलाएं एवं बच्चों की तादाद बढ़ गयी है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे पांच की रिपोर्ट के मुताबिक कटिहार जिले में अंडरवेट बच्चों की तादाद बढ़ गयी है. राष्ट्रीय पोषण दिवस व पोषण माह के संदर्भ में सरकार के इस रिपोर्ट व ग्राउंड रियलिटी पर प्रभात खबर की पड़ताल करती यह रिपोर्ट. मात्र 13.8 प्रतिशत बच्चों को मिलता है पौष्टिक आहार रिपोर्ट के मुताबिक कटिहार जिले के हर दूसरा बच्चा अंडरवेट है. साथ ही महिलाओं में खून की कमी के मामले में भी वृद्धि हो गयी है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की यह रिपोर्ट जिला प्रशासन और राज्य सरकार के लिए चौंकाने वाला है. एनएफएचएस चार की तुलना में एनएफएचएस पांच की रिपोर्ट के मुताबिक पोषण के मामले में कटिहार की स्थिति अत्यंत खराब है. नवजात शिशु, बच्चे, किशोरी व महिलाओं में न केवल पोषण के प्रति समझ कम है. बल्कि कुपोषण के शिकार भी है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार पोषण के मामले में इस जिले की स्तिथि गंभीर है. एनएफएचएस पांच की रिपोर्ट के अनुसार कटिहार जिले के 6-23 महीने की आयुसमूह के 100 में मात्र 13.8 बच्चे को ही पौष्टिक आहार मिल पाता है. जिले में बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य की स्थिति राष्ट्रीय मानक की तुलना में ठीक नहीं है. यद्यपि इस सर्वे के अनुसार पिछले सर्वे की तुलना में कई सूचकांक पर स्थिति में सुधार पायी गयी है. एनएफएचएस-चार के अनुसार जिले में स्तनपान करने वाले छह से 23 महीने के बच्चों में से मात्र 13.6 प्रतिशत को ही पर्याप्त पौष्टिक आहार प्राप्त हो रहा है. 65.6 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी एनएफएचएस-पांच में 6-59 महीने की उम्र में लगभग दो तिहाई बच्चे यानी 65.6 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाया गया है. जबकि 2015-16 में जारी एनएफएचएस चार की रिपोर्ट में इस आयुवर्ग के 61.3 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित थे. दूसरी तरफ 15-49 आयु वर्ग समूह की 61.0 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है. पांच-छह साल पहले 57.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित थे. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि पीढ़ी दर पीढ़ी कुपोषण चक्र बना हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में केवल 16.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान सौ दिनों या उससे अधिक दिनों तक आयरन और फोलिक एसिड की दवा का सेवन किया. इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के बीच कुपोषण की जानकारी का आधार उम्र के अनुसार कम ऊंचाई, ऊंचाई के अनुसार कम वजन, उम्र के अनुसार कम वजन के आधार पर बच्चों के कुपोषण का आकलन किया गया है. पिछले सर्वे की तुलना इस बार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के वजन में भी गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले सर्वे में कटिहार जिले में 45.1 प्रतिशत बच्चे का वजन निर्धारित वजन से कम था. लेकिन इस सर्वे के अनुसार इस जिले में में 48.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले है. पोषण की कमी का यह है मुख्य कारण बच्चों के खराब पोषण की स्थिति के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बाल अधिकार कार्यकर्ता राजीव रंजन की मानें तो बाल कुपोषण बच्चों के जीवन में बहुत बड़ा क्षति है, जो आगे चलकर किशोरावस्था एवं वयस्क अवस्था पर प्रभाव डालता है. आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार कम ही मिल पाता है. आंगनबाड़ी केंद्र की आधारभूत संरचना में भी काफी कमी है. इसलिए नीतियों को पारदर्शी और योजनाओं में और अधिक बजट को बढ़ाकर कुपोषण से संबंधित सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है. एनएफएचएस-चार व पांच की खास बातें ————————- सूचकांक एनएफएचएस-4 एनएफएचएस-5 ———– ———— ————- गर्भवती माता में एनीमिया- 57.8 61.0 गैर गर्भवती माता में एनीमिया- 64.3 68.9 महिलाओं में एनीमिया- 65.7 66.7 6-23 माह के बच्चे को आहार- 7.9 13.8 05 वर्ष तक के अंडरवेट बच्चा- 45.1 48.1

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