ePaper

यहां 2 हजार साल पीछे पहुंच इतिहास को महसूस कर सकेंगे आप

Updated at : 03 Aug 2019 9:37 AM (IST)
विज्ञापन
यहां 2 हजार साल पीछे पहुंच इतिहास को महसूस कर सकेंगे आप

बिहार म्यूजियम आम दर्शकों के लिए शुक्रवार से नयी बनी इतिहास की बी गैलरी खोल दी गयी. इसके साथ ही करीब दो हजार साल पुराने मगध के इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर से भी पर्दा उठ गया है. यहां दर्शक अब मगध के इतिहास को करीब से देख सकेंगे. इसमें शुंग, कुषाण, गुप्त और […]

विज्ञापन

बिहार म्यूजियम आम दर्शकों के लिए शुक्रवार से नयी बनी इतिहास की बी गैलरी खोल दी गयी. इसके साथ ही करीब दो हजार साल पुराने मगध के इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर से भी पर्दा उठ गया है. यहां दर्शक अब मगध के इतिहास को करीब से देख सकेंगे. इसमें शुंग, कुषाण, गुप्त और पाल राजवंशों से जुड़े पुरावशेष रखे गये हैं. यहां घूमते हुए लगेगा कि आप नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन खंडहरों के बीच हैं. यह गैलरी बेहद आधुनिक है. इसके खुलने के पहले दिन प्रभात खबर की टीम यहां पहुंची. इसमें कदम रखते ही लगता है कि आप टाइम मशीन से दो हजार साल पीछे चले गये हैं. गैलरी की बनावट दर्शकों को रोमांचित कर देती है. पेश है यह रिपोर्ट.

शुक्रवार से शुरू हुई नयी गैलरी-बी

शुंग काल यानी ईसा से 185 साल पहले. पुष्यमित्र शुंग के वक्त में इसी मगध से विजुअल आर्ट्स और स्थापत्य कला पर शानदार काम हुआ था. कुषाणों के समय 50 ई तक संस्कृतियों का मिलन हुआ, गुप्त काल में 320 ई पूर्व में रचनात्मकता और समृद्धि का युग चरम पर था और जब पाल राजवंश का काल आया तो बौद्धिक आदान प्रदान अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया. अगर आपको इस कालखंड के इतिहास के रहस्यों से पर्दा उठाना है तो बिहार म्यूजियम आपका इंतजार कर रहा है. इसके लिए आपको यहां घूमने के लिए आना होगा. शुक्रवार को म्यूजियम के निदेशक युसूफ ने बी गैलरी की अनौपचारिक रूप में शुरुआत की. उन्होंने कहा कि यह बी गैलरी मगध के इतिहास की सबसे प्रमुख कड़ी है. जब शुंग से लेकर पाल काल में मगध की प्रसिद्धि चरम पर थी. यहां आकर अब दर्शक मगध के इतिहास को देख ही नहीं बल्कि महसूस भी कर सकेंगे.

यहां मुंडेश्वरी मंदिर और कुर्किहार के बारे में भी समझिए

यहां कैमूर के प्रसिद्ध मुंडेश्वरी मंदिर की प्रतिकृति भी काफी खूबसूरती से डिजाइन की गयी है. मुख्य दरवाजे को ठोस स्वरूप में स्थापित किया गया है जबकि मंदिर का दायें और बायें का हिस्सा विजुअल से दिखाया गया है. मंदिर के बीच में पुजारी आरती उतारते रहते हैं. दिल्ली की ग्रोअर ऑडियो विजुअल नामक एजेंसी को म्यूजियम की ओर से काम दिया गया. पटना में इनका काम देख रहे शहाबुद्दीन ने बताया कि यह कांसेप्ट हमें दिया गया था, जिसके बाद हमने इसे इस रूप में बनाया है. कुर्किहार में नौवीं शताब्दी ई के पास कांस्य शिल्प का बड़ा केंद्र था. कांस्य की इतनी शानदार मूर्तियां वहां बनती थी कि इसकी प्रसिद्धी दूर – दूर तक थी. उसके वैभव का अंदाजा बिहार म्यूजियम में इस गैलरी को देखकर लगाया जा सकता है.

नालंदा, ओदंतपुरी, विक्रमशिला और तेल्हाड़ा विश्वविद्यालय के बारे में भी जानिए
नालंदा, ओदंतपुरी, विक्रमशिला और तेल्हाड़ा विश्वविद्यालय गुप्त से लेकर पाल काल के दौरान मगध में थे. इन विश्वविद्यालयों में मानविकी, धर्म से लेकर विज्ञान और तंत्रशास्त्र की शिक्षा दी जाती थी. नालंदा के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन वहीं बिहारशरीफ में पालवंश के दौरान बौद्ध धर्म के अध्ययन का बड़ा केंद्र ओदंतपुरी के रूप में मौजूद था. यहां नालंदा के अनुभवों को महसूस करने के लिए नालंदा स्टेप्स बनवाये गये हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola