फास्ट फूड से स्कूलों में कमजोर हो रहे छोटे बच्चे

Updated at : 27 Nov 2017 10:55 AM (IST)
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फास्ट फूड से स्कूलों में कमजोर हो रहे छोटे बच्चे

पटना: फास्ट फूड बच्चों ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी की पसंद बन चुका है. आम तौर पर इसे खाने के कई दुष्परिणाम बताये जा रहे हैं. बावजूद पिज्जा, बर्गर, मोमो, चाउमिन, नुडल्स आदि ने दुकान, ठेला व रेस्तरां से लेकर घरों में भी जगह बना ली है. सीबीएसइ द्वारा हाल ही में कराये गये एक […]

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पटना: फास्ट फूड बच्चों ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी की पसंद बन चुका है. आम तौर पर इसे खाने के कई दुष्परिणाम बताये जा रहे हैं. बावजूद पिज्जा, बर्गर, मोमो, चाउमिन, नुडल्स आदि ने दुकान, ठेला व रेस्तरां से लेकर घरों में भी जगह बना ली है. सीबीएसइ द्वारा हाल ही में कराये गये एक सर्वे में यह बात सामने आयी है कि फास्ट फूड बच्चों की याददाश्त समेत स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है. दृष्टि दोष व अन्य बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. जबकि इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में हॉस्टल में रहनेवाले विद्यार्थियों की दिन की शुरुआत अमूमन फास्ट फूड के साथ ही होती है. चिकित्सक हों या डायटीशियन कोई भी फास्ट फूड के पक्ष में खड़ा नहीं है. बावजूद इसकी बिक्री व खानेवालों की संख्या में कमी नहीं आ रही है. यह एक अहम सवाल है.

हैवी होने के कारण सुस्ती व कमजोर होती है याददाश्त

डायटीशियंस की मानें, तो कभी कभार फास्ट फूड खा लिया जाये तो ठीक है, लेकिन अधिक खाना या रूटीन में शामिल करना ठीक नहीं है. बर्गर वगैरह में बड़े ब्रेड के साथ आलू की टिक्की होती है, जिसे खाने के बाद सुस्ती महसूस होती है. इससे नींद भी आती है. इस कारण याददाश्त पर प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा ब्लड प्रेशर समेत अन्य बीमारियां भी जकड़ना शुरू कर देती हैं.

शिक्षण संस्थानों के बाहर व भीतर अच्छी है मांग

स्कूलों और इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व मेडिकल कॉलेजों के आसपास फास्ट फूड के कई स्टॉल मिल जायेंगे, जहां विद्यार्थियों अथवा युवाओं की भीड़ होती है. उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थित कैंटीनों में तो चाइनीज व फास्ट फूड की उपलब्धता व बिक्री अपेक्षाकृत अधिक होती है. स्थानीय उच्च शिक्षण संस्थान के एक पदाधिकारी ने बताया कि विद्यार्थी रोटी-चावल के बजाय फास्ट फूड खाना अधिक पसंद करते हैं. खास कर सुबह नाश्ते के रूप में. अपने संस्थान स्थित कैंटीन में अनेक विद्यार्थियों को उन्होंने दोपहर व रात में भी फास्ट फूड लेते देखा है.

विद्यार्थियों में फास्ट फूड अत्यधिक पसंद किया जाता है. सुबह नाश्ते के रूप में कई विद्यार्थी फास्ट फूड का सेवन करते हैं. संस्थान कैंटीन में भी फास्ट फूड की बिक्री अधिक होती है. हालांकि विद्यार्थियों को इसका कम से कम सेवन करने के प्रति जागरूक भी किया जाता है.

कृष्ण मुरारी, सचिव, एनएसआइटीएम

क्या कहते हैं डायटीशियन

फास्ट फूड से याददाश्त कमजोर करने के साथ ही कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. बर्गर को ही लें, तो दो बड़े ब्रेड के साथ आलू की टिक्की से आलस व नींद आती है. यह ब्लड प्रेशर व याददाश्त को भी प्रभावित करता है. बड़े ब्रेड की जगह ब्रेड के साथ सलाद लें या डेली रूटीन में अंकुरित चना, सत्तू का शर्बत आदि का सेवन करें, तो यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा. इसके अलावा सलाद के साथ लाइट ब्रेड, ब्राउन ब्रेड भी लिया जा सकता है.

सुमिता कुमारी, डायटीशियन

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