बच्चों से बात करते समय भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, वरना टूटेगा मनोबल, जानें सही तरीका

Updated at : 06 Aug 2025 11:26 PM (IST)
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parents talking to their child

Pic Credit- Meta AI

Parenting Tips: बच्चों से बात करते समय माता-पिता जो शब्द चुनते हैं, वही उनके आत्मविश्वास और सोच की नींव रखते हैं. यह लेख उन पांच आम बातों को उजागर करता है जिन्हें माता-पिता को बच्चों से कहते वक्त भूलकर भी नहीं बोलना चाहिए, और उनके सकारात्मक विकल्प क्या हो सकते हैं. जानिए कैसे आपकी बातें उनके जीवन की दिशा तय कर सकती हैं.

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Parenting Tips: बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका सिर्फ उन्हें खाना, कपड़ा और शिक्षा देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के निर्माण में सबसे अहम योगदान होता है. और इसमें सबसे शक्तिशाली औजार होता है—बोलने का तरीका और शब्दों का चयन. आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में कई बार माता-पिता बच्चों से ऐसे शब्द कह देते हैं, जिनका असर लंबे समय तक उनके मन पर रहता है. इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि बच्चों से बात करते समय किन शब्दों से बचना चाहिए और किन शब्दों को अपनाना चाहिए, ताकि उनका विकास सकारात्मक दिशा में हो सके.

बच्चों से बात करते समय इन शब्दों से बचें

तुमसे कुछ होता ही नहीं, तुम कुछ कर ही नहीं पाते हो, तुम हमेशा गड़बड़ करते हो, चुप रहो!” या “तुम बहुत शरारती हो, इन वाक्यों को कहने से बचें. क्योंकि ये सारी चीजें आत्म विश्वास को कम कर देती है. इसके बजाय आप कहें कि तुमने अच्छी कोशिश की है, या फिर कहें कि इस काम को करते समय.ये गलती न करें हैं. बच्चा अगर किसी चीज के लिए जिद कर रहे हैं तो बोलें, चलो पहले शांति से बात करते हैं, फिर देखेंगे. ध्यान रखें इस दौरान किसी और से तुलना न करें.

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बच्चों से बात करते समय अपनाएं ये शब्द

मैं तुम पर भरोसा करता/करती हूं- इससे बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं.
तुमने बहुत अच्छा किया! – सकारात्मक प्रतिक्रिया उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है.
कोशिश करते रहो, मैं तुम्हारे साथ हूं- यह वाक्य उन्हें हिम्मत देता है.
तुम्हारी बात सुनना मुझे अच्छा लगता है- इससे बच्चों को लगता है कि उनकी राय की अहमियत है.
गलती करना गलत नहीं है, सीखना जरूरी है- इससे वे असफलता से डरने की बजाय उससे सीखने लगते हैं.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

मनोविज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का दिमाग 80 फीसदी तक 5 साल की उम्र तक विकसित हो जाता है. ऐसे में उनके साथ की जाने वाली बातचीत उनके पूरे जीवन की सोच और आत्मविश्वास को आकार देती है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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