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बरसात में इन चीजों से बना लें दूरी वरना लगाने पड़ेंगे डॉक्टरों के चक्कर, आयुर्वेद से जानें सेहत का सही फॉर्मूला

Updated at : 24 Jun 2025 6:22 PM (IST)
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Diet Plan For Monsoon

Pic Credit- Meta AI

Diet Plan For Monsoon: बरसात में क्या खाएं और क्या न खाएं? जानें आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों से दूरी बनाकर आप पेट की बीमारियों और मौसमी संक्रमण से बच सकते हैं. यहां पाएं सेहत का सही फॉर्मूला.

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Diet Plan For Monsoon: बारिश का मौसम हर किसी को सुहाना लगता है. रिमझिम बरसता पानी और मिट्टी की खुशबू दिल को सुकून देती हैं. लेकिन यही मौसम सेहत के लिए कई बीमारियों को न्योता भी देता है. आयुर्वेद के अनुसार, बरसात में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और शरीर में वात और कफ दोष बढ़ने लगते हैं. ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना जरूरी है ताकि आप मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बच सकें. आइए जानते हैं कौन से खाने-पीने की चीजें बरसात में न खाएं.

ज्यादा तला-भुना खाना

बारिश के मौसम में अगर झमाझम पानी बरस रहा हो तो गरमा गरम चाय पकोड़े या समोसा खाने दिल किसे नहीं करता है. जब भी हम कहीं बाहर इन चीजों को गरम तेल में तलता देख लेते हैं तो मुंह में पानी आना लाजमी है. लेकिन आयुर्वेद की मानें तो इस मौसम में इन चीजों से बचने की सलाह दी जाती है. क्योंकि ये भारी और पचने में मुश्किल होते हैं, जिससे पेट खराब होने, गैस और एसिडिटी की समस्याएं बढ़ जाती हैं.

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दही और छाछ

आयुर्वेद के अनुसार बारिश में दही, छाछ और अत्यधिक ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. ये कफ दोष को बढ़ाते हैं और गले में खराश, सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ा देते हैं.

कच्चे सलाद और कटे हुए फल

यूं तो कच्चे सलाद और कटे हुए फल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.लेकिन आयुर्वेद की मानें तो बारिश में बाजार से लाए कच्चे सलाद और कटे फल खाने से बचना चाहिए. क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है, जिससे फूड पॉइजनिंग या पेट इंफेक्शन हो सकता है.

बारिश में ज्यादा मांस-मछली या नॉनवेज भी ठीक नहीं

बरसात में मांस-मछली जैसे भारी और देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना अच्छा होता है. क्योंकि ये पाचन पर दबाव डालते हैं जिससे पेट संबंधी दिक्कतें बढ़ जाती हैं.

बासी और बहुत नमक वाला खाना

आयुर्वेद में बासी भोजन और अधिक नमक वाले खाने (जैसे अचार) को बरसात में नुकसानदायक माना गया है. इससे पेट में सूजन, गैस और जलन की समस्या हो सकती है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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