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ममता बनर्जी का दावा- बंगाल में एसआईआर ने ले ली 84 जानें, 54 लाख वोटर को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका

13 Jan, 2026 7:30 pm
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mamata banerjee sir took 84 lives in bengal

नबान्न में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करतीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. फोटो : प्रभात खबर

बंगाल में जारी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही. टूटू बोस और उनके परिजनों को नोटिस मिलने पर तृणमूल नेता कुणाल घोष ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया, तो ममता बनर्जी ने भी ईसीआई पर गंभीर आरोप लगाये हैं. ममता बनर्जी ने कहा है कि एसआईआर की वजह से अब तक बंगाल में 84 लोगों की जान जा चुकी है. 54 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये. उन्हें अपना पक्ष तक नहीें रखने दिया गया. बंगाल की सीएम ने कहा है कि चुनाव आयोग अभी और एक करोड़ लोगों के नाम काटने की तैयारी में है.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दावा किया है कि राज्य में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले शुरू किये गये मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने अब तक 84 जानें ले लीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े मंगलवार सुबह तक के हैं. इसमें 17 लोगों की मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई और 4 लोगों ने आत्महत्या कर ली. टीएमसी सुप्रीमो ने दावा किया कि इन सभी लोगों की मौत एसआईआर नोटिस मिलने के बाद हुई है.

चुनाव आयोग, भाजपा, दुर्योधन और दुशासन ले मौतों की जिम्मेदारी – ममता

ममता बनर्जी ने कहा है कि चुनाव आयोग को इन सभी मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. भाजपा को भी इन सभी लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. ममता बनर्जी ने कहा कि यहां तक कि दुर्योधन और दुशासन की इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भाजपा के निर्देश पर एआई के जरिये मतदाताओं के नाम हटाये जा रहे हैं. उन्होंने कहा- जहां तक हमारी जानकारी है, उनकी योजना है कि वे बिहार, झारखंड और ओडिशा के लोगों को बंगाल में लाकर वोट करवायें.

बंगाल के 54 लाख मतदाताओं को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि 54 लाख मतदाताओं के नाम एकतरफा तरीके से और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) की शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए हटा दिये गये. कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गये, उनमें से ज्यादातर ‘वास्तविक मतदाता’ थे. उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि उनके नाम क्यों काटे गये हैं.

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बंगाल में और एक करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जायेंगे – ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भाजपा-निर्वाचन आयोग का गठजोड़ अंतिम मतदाता सूची से एक करोड़ और नाम हटाने की योजना बना रहा है. आोयग ने बूथ स्तरीय एजेंट-2 को एसआईआर संबंधी सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि भाजपा इसके लिए अपने कार्यकर्ताओं को इकट्ठा नहीं कर पायी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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