शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग करता रहेगा JMM, पद्म भूषण सम्मान का किया स्वागत

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शिबू सोरेन के लिए JMM ने की भारत रत्न की मांग

Shibu Soren: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत रत्न दिए जाने की मांग आगे भी जारी रखेगी.

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Shibu Soren: झारखंड आंदोलन के सबसे आगे के नेता, अलग झारखंड राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की है. केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें लोक कल्याण और सामाजिक योगदान के लिए गुरुजी के नाम को शामिल किया गया है. गुरुजी को यह सम्मान मिलने से झारखंड के लोगों में खुशी का माहौल है और उनकी पार्टी जेएमएम ने भी इस सम्मान का स्वागत किया है. हालांकि जेएमएम ने स्पष्ट किया है कि वह गुरुजी के लिए भारत रत्न की मांग करता रहेगा.

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संघर्ष से शुरू हुआ जीवन, आंदोलन से बनी पहचान

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. जब शिबू सोरेन किशोर थे, तभी उनके पिता की हत्या हो जाने के बाद से उनका जीवन संघर्षों से भर गया. महाजनों के शोषण, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के खिलाफ उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना और गांव-गांव जाकर लोगों को उनके अधिकारों के लिए जागरूक किया. जल, जंगल और जमीन की रक्षा गुरुजी के जीवन का मूल मंत्र रहा. उन्होंने नशा मुक्ति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए भी लगातार काम किया, जिससे आदिवासी और मूलवासी समाज को नई दिशा मिली.

झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे

गुरुजी करीब चार दशकों तक झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे. उनके संघर्षों के परिणाम है कि झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और दुमका लोकसभा क्षेत्र से आठ बार सांसद चुने गए. इसके अलावा वे राज्यसभा सदस्य और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे. 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और आदर्श आज भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं.

जेएमएम ने क्या कहा

पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के बाद झारखंड समेत पूरे देश में उनके समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है. झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने देश के जंगलों और आदिवासी समाज की आवाज को संसद तक पहुंचाया. उन्होंने कहा कि गुरुजी ने हाशिये पर खड़े समाज को मुख्यधारा में लाने का काम किया.

भारत रत्न की मांग जारी

विनोद पांडेय ने यह भी स्पष्ट किया कि पद्म भूषण सम्मान के बावजूद गुरुजी को भारत रत्न देने की मांग आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि गुरुजी का जीवन और संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि वे भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं. गुरुजी के निधन के बाद झारखंड विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से गुरुजी को भारत रत्न देने के प्रस्ताव को पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है. विनोद पांडे ने कहा, ‘वैसे भारत सरकार ने दिशोम गुरु जी को पद्म विभूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया है इसके लिए उन्हें साधुवाद, लेकिन मैं फिर दोहराऊंगा कि मेरे साथ-साथ दिशोम गुरूजी के करोड़ों समर्थक चाहेंगे कि उन्हें भारत रत्न मिले.’

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